182/2026, बाल कहानी- 14 अक्टूबर
#दैनिक_नैतिक_प्रभात - 182/2026
*14 अक्टूबर 2026 (बुधवार)*
#बाल_कहानी - #गुल्लक
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बहुत तेज बारिश और हवाओं के चलते स्कूल चार दिनों से बन्द था। इन हवाओं के कारण कई पेड़ गिर गए थे और कई लोगों के घरों में पानी भर गया था। रामू काका का तो घर ही गिर गया था।
चार दिन की छुट्टी के बाद मीनू स्कूल आई तो अपनी गोलक भी बस्ते में रख कर ले आयी थी। मीनू को चीज खाने के लिए पापा जो पैसे देते थे, वह पैसे अपने गुल्लक जमा करती रहती थी।
पर वह अपनी गुल्लक स्कूल क्यों लाई थी... सभी बच्चे पूछ रहे थे। कुछ बच्चों ने प्रिन्सिपल सर से शिकायत कर दी कि मीनू बस्ते में गुल्लक छुपा कर लाई है।
सर ने पूछा तो पहले तो वह डर गई, फिर उसने बताया कि "वो रामू काका का घर बारिश में गिर गया है न.. उनकी बेटी शिवानी मेरी मित्र है इसलिए मैं इन पैसों से उनकी मदद करना चाहती हूँ।"
"अच्छा शिवानी.. वह तो अपने स्कूल में ही कक्षा सात में पढ़ती है.. क्या उसका घर गिर गया है?" सर ने चिन्तित होते हुए कहा, "जी सर..।"
"पर इस गुल्लक में कितने पैसे होंगे, इतने पैसों में उनकी क्या मदद होगी?" सर जी बोले
जितने भी हों पर.. पर मैं उनकी मदद करना चाहती हूँ।"
सर ने शिवानी को शाबाशी देते हुए कहा कि, "ये तो बहुत अच्छी बात है। हमें हमेशा मुसीबत में एक-दूसरे की मदद करनी चाहिए।
फिर प्रिन्सिपल सर ने स्कूल के सभी बच्चों को ये बात बतायी और सभी के सामने गुल्ल्क तोड़कर पैसे गिने तो पाँच सौ के लगभग रूपये निकले।
पर यह क्या...! शिवानी को देखकर जो बच्चे अपने घर से चीज खाने के लिए दस, पाँच, बीस रूपये लाये थे, वह सभी प्रिन्सिपल सर की मेज पर जमा कर दिए शिवानी की मदद के लिए।
नन्हे बच्चों का अति उत्साह देखकर प्रिन्सिपल सर भाव-बिभोर हो गए। उन्होंने भी अपने साथी शिक्षकों से बात की तो उन्होंने भी एक एक हजार रूपये मिला दिए। इस तरह सब मिलाकर पाँच हजार रूपये इकट्ठा हो गए। छुट्टी के बाद प्रिन्सिपल सर अपने साथी शिक्षकों, मीनू और कुछ बच्चों के साथ रामू काका के घर गये। रास्ते में दो हजार का आटा-दाल आदि खाने-पीने का सामान ले लिया।
प्रिन्सिपल सर ने वह सामान और बचे तीन हजार रूपये रामू काका को दिए और बताया कि किस तरह मीनू की गुल्लक से ये सारी मदद यहाँ तक आ पहुँची।
रामू काका हाथ जोड़कर बार-बार आभार जता रहे थे और शिवानी तो मीनू के गले लगकर रो ही पड़ी।
#संस्कार_सन्देश -
इस कहानी से हमें दो प्रकार की शिक्षा मिलती है कि हमें हमेशा बचत करनी चाहिए, जो वक्त जरूरत काम आती है।
कहानीकार-
#जमीला_खातून (से०नि०प्र०अ०)
प्रा० पा० गढ़धुरिया गंज
नगर क्षेत्र एवं ब्लाॅक- मऊरानीपुर
जिला- झाँसी (उ०प्र०)
✏️संकलन
📝टीम #मिशन_शिक्षण_संवाद
#दैनिक_नैतिक_प्रभात
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