189/2026, बाल कहानी- 27 अक्टूबर

#दैनिक_नैतिक_प्रभात- 189/2026
*27 अक्टूबर 2026 (मंगलवार)*
#बाल_कहानी - #शरद_पूर्णिमा_और_तीन_दोस्त
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बहुत समय पहले की बात है। बौखर गाँव में गोलू, मीना और छोटा भोलू तीन दोस्त रहते थे। शरद पूर्णिमा आने वाली थी। गाँव के बड़े-बूढ़े कह रहे थे कि "इस बार की पूर्णिमा सबसे खास है। कहते हैं, इस रात चन्दा मामा पूरी सोलह कलाओं से चमकते हैं और जो खीर खुले आसमान में रखी जाती है, उसमें अमृत बरसता है।" तीनों दोस्तों ने सोचा कि "हम भी अमृत वाली खीर खाएँगे।" मीना की माँ ने शाम को दूध में चावल डालकर खीर बनायी। गोलू बगीचे से ताजे फूल लाया। भोलू छोटे-छोटे दिया जलाकर आँगन में रखने लगा। 
रात हुई। पूरा आँगन चाँदनी में नहा गया। ऐसा लगा, जैसे किसी ने सफेद चादर बिछा दी हो। बीच आँगन में खीर की थाली रखी थी।
तभी उन्हें एक धीमी-धीमी आवाज सुनाई दी - "म्याऊँ... म्याऊँ...।" देखा तो एक भूखी बिल्ली और उसके दो छोटे बच्चे थाली के पास बैठे थे। भोलू बोला- "इन्हें भगा देते हैं, नहीं तो ये हमारी अमृत वाली खीर खा जाएँगे।" मीना ने कहा- "नहीं! दादी कहती हैं शरद पूर्णिमा पर सबका पेट भरना चाहिए, तभी लक्ष्मी मैया खुश होती हैं।" गोलू ने छोटी कटोरी में थोड़ी खीर निकाल कर बिल्ली को दी। बिल्ली खुश होकर चली गयी। थोड़ी देर बाद एक बूढ़ा बाबा लाठी टेकते हुए आया- "बेटा! बहुत भूखा हूँ, दो दिन से कुछ नहीं खाया।"
तीनों ने बिना सोचे अपनी थाली से आधी खीर बाबा को दे दी। बाबा ने मुस्कुराकर आशीर्वाद दिया - "तुम तीनों का दिल चाँद जैसा उजला है।" अब थाली में थोड़ी-सी ही खीर बची थी। तीनों उदास हो गए- "हमारे लिए तो अमृत ही नहीं बचा।" तभी दादी आँगन में आयी और बोली- "अरे, चाँद को देखो!" तीनों ने ऊपर देखा। चाँद इतना सुन्दर, इतना बड़ा और इतना चमकीला लग रहा था, जैसा पहले कभी नहीं देखा। उसकी रोशनी सीधी उनकी छोटी सी खीर की थाली पर पड़ रही थी। दादी ने कहा- "तुमने भूखे को खिलाया, यही तो असली अमृत है। शरद पूर्णिमा पर चन्दा मामा यही देखते हैं- किसके दिल में दूसरों के लिए प्यार है।" तीनों दोस्तों ने बची हुई थोड़ी-सी खीर मिल-बाँट कर खाई। उन्हें लगा कि आज की खीर दुनिया की सबसे मीठी खीर है।
उस रात के बाद गाँव में सब कहने लगे- शरद पूर्णिमा की असली पूजा है- बाँटकर खाना और सबके साथ खुश रहना।

#संस्कार_सन्देश- 
दूसरों को खिलाने में जो आनन्द है, वही सच्चा अमृत है। जैसे- चाँद सबको रोशनी देता है किसी से भेदभाव नहीं करता है, ठीक वैसा ही बनो।

कहानीकार- 
#मिथुन_भारती (स०अ०)
प्राथमिक विद्यालय बौखर
वि० क्षे० सरीला जनपद- हमीरपुर (उ०प्र०)

✏️संकलन
📝टीम #मिशन_शिक्षण_संवाद
#दैनिक_नैतिक_प्रभात

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