शक्ति दर्शन-7, मन की बात-इन्द्रधनुषी रंगों सा हो जीवन, प्रवीणा दीक्षित
शक्ति दर्शन -7
मन की बात-
*इन्द्रधनुषी रंगों सा हो जीवन*
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हमारे देश में ही नहीं सम्पूर्ण विश्व में भारतीय सभ्यता और संस्कृति की इन्द्रधनुषी विरासत हमारे सनातन मूल्यों की प्राण-प्रतिष्ठा सदियों से करती आई है। समाज की मर्यादा व गरिमा का मूल आधार, समाज की सुव्यवस्था और सुप्रगति का अमोघ साधन जो कि लालित्यमयी स्वरूप में समाज में प्रतिष्ठित है; वह है-- नारी।
नारी का सात्विक शील व्यक्तित्व, बहुमुखी पारिवारिक सम्बन्धों व सामाजिक सम्बन्धों में विकास की ऊँचाई छूता है।
सभ्यता भौतिकता की जननी है तो संस्कृति आध्यात्मिकता की।भारतीय संस्कृति कला की परिपोषक रही है। कला का काम मात्र मनोरंजन करना ही नहीं वरन् मन को परिष्कृत करना भी है। यह कला ही हमारे मन में सत्यम्, शिवम् और सुंदरम् की भावना पल्लवित करती है। नारी और कला एक दूसरे की पर्याय हैं। वास्तव में माना जाए तो नारी इस संसार की सबसे खूबसूरत कलाकृति है। जाहिर है उसका झुकाव बचपन से ही सुंदरतम् कलाओं की ओर होता है।वह अपने सृजन कौशल से चित्र कारी, गायन, वादन तथा नृत्य के गुण अपनी भावी पीढ़ी मे पलल्वित और पोषित करती है ।जब-जब उसे अपनी अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता मिली उसने अपनी सृजन क्षमता का परिचय दिया। मेरी साथी शिक्षिकाएँ भी हमारे बेसिक के बच्चों के अनगढ़ हाथों को तराश कर एक नई इबारत गढ़ने को तैयार हैं। हमारी शिक्षिकाएँ कभी पत्थरों, सीपियों, घास-फूस, मिट्टी की कलाकृतियों, बेकार पड़ी अनुपयोगी चीजों से, तो कभी अपने थिरकते पैरों से, कभी अपनी सुर साधना से, अपनी उत्कृष्ट कला- कौशल को वे हमारे नौनिहालों को देतीं हैं जिससे यही कला उन्हें नये मुकाम पर ले जा सके।
आज जब नैतिक मूल्य ध्वस्त हो रहे हैं तो शिक्षिका के रूप में नारी का दायित्व बनता है कि अपनी कोमल सृजनात्मक शक्ति को वह अपने बालकों में विकसित कर सके जिससे शिक्षा को गुणवत्ता व रचनात्मकता से जोड़ा जा सके।
जाग उठा नारी समाज है,
नवयुग का निर्माण करेगा।
मानवता की ममता लेकर,
बच्चों का कल्याण करेगा।।
प्रवीणा दीक्षित
Kgbv Kasganj
संकलन:-
बहुत ही सुंदर लेख प्रवीणा मैम
ReplyDeleteमार्मिक एवं हृदय स्पर्शी शब्द सृजन
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