शारदे अरज करूँ

सारे ही जगत का कल्याण माँ कीजिए।
शारदे अरज करूँ गौर माँ दीजिए।।
खुशियों के फूल खिलें, मन से मन मिलें।
रोग-शोक सारा ही हर माँ लीजिए।
बैर भाव, गैर भाव जग की न रीति हो।
प्रीति वाला चला दस्तूर माँ दीजिए।।
शब्द-शब्द लेखनी का अमृत पान दे।
कंठ को मीठा-मीठा गान माँ दीजिए।।
लाल वो ही माई का देश पर जो जान दे।
घर-घर ऐसे ही लाल माँ दीजिए।।
नारी का मान हो जय जय गुणगान हो।
भटके जो पुरुष तो ज्ञान माँ दीजिए।।
वृद्ध न खिन्न हों, बाल न विपन्न हों।
अन्न धन, भाग्य सौभाग्य माँ दीजिए।।
देश का जवान हो, चाहे तो  किसान हो।
देकर आशीष चिंरजीवी माँ कीजिए।।
खेत भी हरे रहें, भंडार भी भरे रहें।
धानी-धानी धरती को रंग माँ दीजिए।।
         
रचयिता
राजबाला धैर्य,
सहायक अध्यापक,
पूर्व माध्यमिक विद्यालय बिरिया नारायणपुर,
विकास खण्ड-क्यारा, 
जनपद-बरेली।

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