आओ खेलें-खेल

तर्ज- आओ बच्चों तुम्हें दिखाएँ, झाँकी हिंदुस्तान की।

आओ बच्चों खेल खेल लें, मिलकर सभी मैदान में।
ग्रुप बना लेंगे हम दो फिर, खेलें खुले मैदान में।।

खेलेंगे मिल संग, खेलेंगे मिल संग......

आउटडोर गेम कहलाते, जिनको हम अब खेल रहे।
खो-खो और कबड्डी दोनों ही में ग्रुप का मेल रहे।।
एक ही साथी दौड़ के छूता, ग्रुप दूसरा शान में।
ग्रुप बना लेंगे दोनों फिर, खेलें खुले मैदान में।।

खेलेंगे मिल संग, खेलेंगे मिल संग.....

साईकिल दौड़ में शामिल अगर हो, तो अकेले चलाओगे।
अन्य सभी को छोड़ तेज गति से आगे बढ़ जाओगे।।
दूरी अधिक, समय कम लेकर, जीत मिले मैदान में।
ग्रुप बना लेंगे दोनों फिर, खेलें खुले मैदान में।।

खेलेंगे मिल संग, खेलेंगे मिल संग.......

ऊँची कूद भी कूदेंगे, हिम्मत तो हम नहीं हारेंगे।
लम्बी-कूद कूदकर अपना, दर्ज रिकॉर्ड सँवारेंगे।।
खेल-कबड्डी जीत दिखाएँ, प्रतिभा अपनी तान में।
ग्रुप बना लेंगे दोनों फिर, खेलें खुले मैदान में।।

खेलेंगे मिल संग, खेलेंगे मिल संग........

रचयिता
श्रीमती नैमिष शर्मा,
सहायक अध्यापक,
परि0 संविलियत पूर्व माध्यमिक विद्यालय तेहरा,
विकास खण्ड-मथुरा,
जनपद-मथुरा।

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