गणेश चतुर्थी

हे गणपति हे विध्नविनाशक,
हे लम्बोदर जनसुखकारक...
प्रथमपूज्य हे मङ्गलकारक,
गौरीसुत गणेश हे विनायक,
नमन सर्वजगत कल्याणकारक,
बुद्धिप्रदाता जनप्रतिपालक।
देवो में हे परमपूज्य हे आनन्दायक,
गजानन हे महा सुरनायक।
महादेवसुत कार्तिकेय भ्राता,
महालक्ष्मी भ्राता सुखदाता,
लड्डूवन भोग प्रभु आप सुहाता,
परमप्रिय मोदक मनभाता।
परम् तेजस्वी परमप्रतापी,
रिद्धि सिद्धि सँग हृदयविराजित,
मूषक सवारी तुमहि अतिपप्यारी,
सदा संग आपहिं अतिशोभित।
सहस्त्र कोटि नमन स्वीकारो,
भक्तन के हे भाग्यविधाता,
शिव गौरी संग सदा विराजो,
मम हृदय हे जनसुखदाता

रचयिता
सुप्रिया सिंह,
इं0 प्र0 अ0,
प्राथमिक विद्यालय-बनियामऊ 1,
विकास क्षेत्र-मछरेहटा,
जनपद-सीतापुर।

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