146/2026, बाल कहानी- 24 अगस्त
#दैनिक_नैतिक_प्रभात - 146/2026
*24 अगस्त 2024 (सोमवार)*
#बाल_कहानी - #नीले_चश्मे_का_सच
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रोहन नाम का एक बहुत ही होशियार लेकिन थोड़ा नटखट लड़का था। उसकी एक बड़ी खराब आदत थी कि वह हमेशा दूसरों में कोई न कोई कमी ढूँढता रहता था। "मोहन बहुत आलसी है," "रिया बहुत धीरे लिखती है," या "अमित कितना झगड़ालू है"- रोहन के पास हर किसी की बुराई तैयार रहती थी।
एक दिन गाँव में एक ज्ञानी साधु आये। रोहन के दादाजी उसे लेकर साधु जी के पास गये और बोले, "महाराज! रोहन दिल का बुरा नहीं है, पर यह हमेशा दूसरों में बुराइयाँ ही देखता रहता है।"
साधु जी मुस्कुराए। उन्होंने अपनी पोटली से नीले रंग का एक चश्मा निकाला और रोहन को पहना दिया। फिर उन्होंने रोहन से पूछा, "बेटा! बताओ, तुम्हें सामने की दीवार किस रंग की दिख रही है?"
रोहन बोला, "महाराज, दीवार नीली है!"
साधु जी ने पूछा, "और वह सामने खड़ा सफेद कुत्ता?"
रोहन ने हँसते हुए कहा, "वह भी नीला दिख रहा है!"
तब साधु जी ने प्यार से रोहन के चेहरे से चश्मा हटाया और बोले, "बेटा! क्या सच में दीवार और कुत्ता नीले थे? "नहीं! वे तो वैसे ही थे जैसे हमेशा होते हैं।"
"तुम्हें वे नीले इसलिए दिख रहे थे क्योंकि तुमने नीला चश्मा पहन रखा था। "साधु जी ने फिर समझाया, "ठीक इसी तरह जब हम अपने मन में दूसरों के प्रति बुराई या गलत सोच का चश्मा पहन लेते हैं, तो हमें पूरी दुनिया और सब लोग बुरे ही दिखाई देते हैं। अगर तुम अपने मन का चश्मा साफ करोगे और खुद के भीतर देखोगे, तो तुम्हें समझ आएगा कि गलतियाँ और बुराइयाँ तो हमारे अपने अन्दर भी छिपी होती हैं।"
रोहन को साधु जी की बात समझ आ गई। उसने फैसला किया कि अब वह दूसरों की कमियाँ निकालने के बजाय खुद को बेहतर इन्सान बनाएगा।
#संस्कार_सन्देश -
दूसरों में बुराई ढूँढने से पहले हमें अपने मन और व्यवहार को देखना चाहिए। जब हम खुद को सुधार लेंगे, तो हमें दुनिया भी अच्छी दिखने लगेगी।
कहानीकार -
#नरेन्द्र_नाथ_पटेल (स०अ०)
कम्पोजिट विद्यालय सुरहन, भदोही, उत्तर प्रदेश
✏️संकलन
📝टीम #मिशन_शिक्षण_संवाद
#दैनिक_नैतिक_प्रभात
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