142/2026, बाल कहानी- 19 अगस्त

#दैनिक_नैतिक_प्रभात - 142/2026
*19 अगस्त 2026 (बुधवार)*
#बाल_कहानी- #पन्द्रह_अगस्त
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साल भर से बच्चों व उनके अभिभावकों को स्वतन्त्रता दिवस, जिसे सामान्यतया पन्द्रह अगस्त कहकर पुकारा जाता है, के दिन का बड़ी उत्सुकता से प्रतीक्षा रहती। पलायन, निजी स्कूलों की भरमार व बाल जन्म दर में कमी का‌ दंश अक्सर हर पहाड़ी सरकारी विद्यालय घटती छात्र संख्या के रूप में झेल रहा है फिर भी प्राथमिक विद्यालय तालकोट में अब भी बीस-पच्चीस बच्चे पढ़ने आ ही रहे थे, जिससे पाठशाला में रौनक बनी रहती। जिन अभिभावकों के पाल्य निजी स्कूलों में जाते, वह भी नजदीक होने से इसी विद्यालय में आकर समारोह का आनन्द लेते। तालकोट से सटे स्थानीय बाजार में नेपाली मजदूर आकर रहते और उनके बच्चे इसी विद्यालय में एडमिशन लेकर पढ़ाई करते। यह सिलसिला काफी समय से चलता आ रहा था। 
कमल जेठारा जिसे अक्सर कमलू कहकर पुकारा जाता, गत वर्ष अपने माता-पिता के साथ आकर अब यहाँ कक्षा तीन में पढ़ रहा था। मजबूत शारीरिक डीलडौल से युक्त बालक कमल को सेना की नौकरी बहुत भाती और सैनिक वर्दी से उसे स्वत: ही काफी मोह-सा बना रहता।
अगस्त के पहले सप्ताह से आयोजन की तैयारियाँ शुरू हो गईं। अन्य समकक्ष बच्चों के साथ कमल भी देशभक्ति के गीतों में बढ़-चढ़कर प्रतिभाग करते हुए सबसे सुन्दर अभिनय करने लगा। विद्यालय के शिक्षकों द्वारा बताया गया कि, "इन गानों में सजीवता लाने के लिए इसमें प्रतिभागिता कर रहे बच्चे फौजी ड्रेस में आयेंगे।" आठ बच्चों की टोली में कमल के सिवा अन्य सभी तुरन्त ड्रेस ले आए लेकिन मजदूरी कर गुजर बसर कर रहे कमल के अभिभावक बाजार से ड्रेस खरीद पाने में लाचार थे, उन्हें ठेकेदार द्वारा माह के अन्त तक पेमेंट करने की बात कही गई थी। 
चौदह अगस्त को फाइनल तैयारी के दिन कमल खामोश था तथा ड्रेस न हो पाने की विवशता से मन ही मन काफी उदास भी। आज उसकी चपलता व उत्साह में कमी देख सर ने कमल से इसका कारण पूछा। पहले तो वह चुप रहा लेकिन बाद में उसने उसके पास ड्रेस न हो पाने की बात उन्हें बता दी। तभी उसका साथी राजेन्द्र बोल उठा, "अरे, तू चिन्ता मत कर! मेरे पास पिछले साल की ड्रेस पड़ी हुई है.. बिलकुल नयी जैसी। मैंने इस बार फिर से नयी ड्रेस ले ली है, मैं तेरे लिए पिछले साल वाली ले आऊँगा।"
पन्द्रह अगस्त के समारोह में इस बार कमल की टीम का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन रहा। सभी दर्शक कमल की काफी तारीफ कर रहे थे। गाँव के रिटायर्ड सुबेदार महरा जी ने कमल के विशेष अभिनय पर उसे पाँच सौ रूपये का व्यक्तिगत पुरस्कार प्रदान करने की घोषणा की। पुरस्कार पाते हुए उत्साह से लबरेज कमल जेठारा राजेन्द्र की ओर अब टकटकी लगाकर देखने लगा। पाँच सौ का नोट प्राप्त कर वह दूर खड़े राजेन्द्र के पास जाकर उसके गले से लिपट गया। अब दोनों बहुत खुश नजर आ रहे थे।

#संस्कार_सन्देश -
मन में अगर उत्साह, जोश और लगन हो तो कोई कुछ भी कर सकता है।

कहानीकार-
#दीवान_सिंह_कठायत (प्र०अ०) 
रा० आ० प्रा० वि० उडियारी बेरीनाग (पिथौरागढ)

✏️संकलन
📝टीम #मिशन_शिक्षण_संवाद
#दैनिक_नैतिक_प्रभात

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