131/2026, बाल कहानी- 5 अगस्त
#दैनिक_नैतिक_प्रभात - 131/2026
*05 अगस्त 2026 (बुधवार)*
#बाल_कहानी - #सच्चे_मित्र_की_पहचान
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किसी सुन्दर जंगल में नीलकण्ठ नाम का एक मोर और रोहन नाम का एक हिरण रहते थे। दोनों में बहुत गहरी दोस्ती थी। वे दिनभर साथ घूमते, खेलते और एक-दूसरे के साथ फल-पत्तियाँ साझा करते थे।
धीरे-धीरे नीलकण्ठ अपनी मीठी बोली और सुन्दर पंखों के कारण पूरे जंगल में मशहूर हो गया। अब जंगल के दूसरे पक्षी और जानवर भी उसके दोस्त बनने लगे। खरगोश, तोता और बन्दर सब नीलकण्ठ के आस-पास मँडराने लगे। नीलकण्ठ को नए दोस्तों के साथ घूमना इतना पसन्द आने लगा कि वह रोहन को थोड़ा कम समय देने लगा।
जब भी रोहन कहता, "मित्र, चलो, नदी किनारे चलते हैं।," तो नीलकंठ अपने नए दोस्तों के साथ निकल जाता।
एक दिन, जब नीलकण्ठ अपने नए पक्षी-मित्रों के साथ एक बड़े फलदार पेड़ पर बैठा था, तभी अचानक वहाँ एक शिकारी आ गया। शिकारी ने चुपके से पेड़ के नीचे बड़ा-सा जाल बिछा दिया। जैसे ही नीलकण्ठ और उसके नए दोस्त नीचे उतरे, नीलकण्ठ का पैर जाल में फँस गया!
नीलकण्ठ घबराकर चिल्लाया, "दोस्तों, मेरी मदद करो! मुझे इस जाल से निकालो!"
लेकिन यह क्या? जैसे ही उसके नए दोस्तों ने शिकारी को आते देखा, वे सब नीलकण्ठ को अकेला छोड़कर झट से उड़ गए। कोई भी उसकी मदद के लिए आगे नहीं आया।
तभी रोहन हिरण वहाँ से गुज़र रहा था। उसने अपने मित्र की पुकार सुनी और बिना अपनी जान की परवाह किए तेजी से दौड़ा आया। रोहन ने देखा कि शिकारी बस थोड़ी ही दूरी पर है। उसने तुरन्त अपनी नुकीली सींगों और पैरों की मदद से जाल की डोरियों को खींचना और तोड़ना शुरू किया। रोहन ने पूरी ताकत लगाकर जाल को इतना ढीला कर दिया कि नीलकण्ठ झट से बाहर उड़ निकला। दोनों तुरन्त शिकारी की पहुँच से दूर भाग गए।
जब वे सुरक्षित जगह पहुँचे, तो नीलकण्ठ की आँखों में आँसू थे। उसने रोहन से माफ़ी माँगते हुए कहा, "मित्र! जब मेरे पास सुख था, तो मेरे बहुत से दोस्त बन गए। लेकिन असली दोस्त तुम हो, जिसने मुसीबत में मेरा साथ दिया।"
#संस्कार_सन्देश -
जो लोग केवल अच्छे समय में हमारे साथ रहते हैं, वे सच्चे दोस्त नहीं होते। सच्चा मित्र वही है, जो कठिन समय और मुसीबत में हमारा साथ कभी न छोड़े।
कहानीकार -
#नरेन्द्र_नाथ_पटेल (स०अ०)
कम्पोजिट विद्यालय सुरहन, भदोही (उत्तर प्रदेश)
✏️संकलन
📝टीम #मिशन_शिक्षण_संवाद
#दैनिक_नैतिक_प्रभात
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