141/2026, बाल कहानी- 18 अगस्त

#दैनिक_नैतिक_प्रभात - 141/2026
*18 अगस्त 2026 (मंगलवार)*
#बाल_कहानी - #मेहनत_का_फल
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मयंक, आयुष और जैकी तीनों दोस्त बहुत ही पढ़ाई में होशियार और अच्छी सोच रखने वाले बच्चे थे। एक दिन उनकी मैडम ने एक कार्य बताया कि, "तुम्हें पुरानी चीजों को इकट्ठा करना है। रास्ते में जो कुछ भी मिलता है उसको लेकर आना है।" तीनों बच्चों ने गाँव में घूमकर एक बोरी पुरानी बेकार की चीज मैडम को लाकर दे दी, जिसमें सबसे अधिक खाली बोतल थीं। उन बोतलों को अपने बगीचे में गमले बनाकर सजा दिया गया और बोतलों से नए आकार के पशु-पक्षी भी बना दिए। सबको बगीचा अच्छा लगने लगा। अगले दिन सभी बच्चों ने देखा। वह भी कुछ न कुछ लेकर आये। मैडम बहुत खुश हुई। उन्होंने एक बगीचे में कुआँ बना दिया और सारा कबाड़ा उसी में डालने लगे। इससे विद्यालय भी साफ सुथरा हो गया और गाँव की सड़क भी सुन्दर लगने लगीं।
एक दिन विद्यालय में निरीक्षण करने अधिकारी आये और जब उन्होंने उसे कुएँ को देखा तो वह हैरान हो गए क्योंकि उसे बगीचे में इतना सुन्दर नजारा था, जिससे मन प्रश्न हो गया और उन्होंने मैडम से पूछा। तब तीनों बच्चों के नाम बताए और कहा कि, "यह सब इन बच्चों की मेहनत का फल है।" साड़ी के देबो से छोटे बच्चों को खेलने का टीएलएम बना कर समझने का तरीका बहुत अच्छा लगा क्योंकि बेस्ट मटेरियल पर आधारित टी. एल. एम बड़े काम का होता है। मिठाई के डिब्बे हों या कार्टून हों कभी फेंकना नहीं चाहिए। यह सब हमारी क्लास रूम में किसी न किसी रूप में लगे हुए हैं।" अधिकारियों ने मैडम और सभी बच्चों की तारीफ की और उन तीन बच्चों को सहयोग करने पर इनाम मिला। अपनी मेहनत का फल मिलते ही बच्चे बहुत खुश हुए और सभी को एक नई सीख मिली कि कभी इस्तेमाल करी हुई चीजों को फेंकना नहीं है। 
इस कहानी से यही सीख मिलती है हमें अपने आस-पास को साफ सफाई के साथ रखना चाहिए और पुरानी चीजों को पहले जानो कि यह किस काम में आ सकती है, इससे क्या बन सकता है? यदि ऐसी सोच रखते हैं तो मेहनत का फल अवश्य मिलता है।

#संस्कार_सन्देश -
सकारात्मक सोच हमें विपरीत परिस्थितयों में भी सफलता दिलाती है।

कहानीकार- 
#पुष्पा_शर्मा (शि०मि०)
राजीपुर, अकराबाद
जिला- अलीगढ़ (उ०प्र०)

✏️संकलन
📝टीम #मिशन_शिक्षण_संवाद
#दैनिक_नैतिक_प्रभात

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