136/2026, बाल कहानी- 11 अगस्त
#दैनिक_नैतिक_प्रभात - 136/2026
*11अगस्त 2026 (मंगलवार)*
#बाल_कहानी - #चोरी_की_ लत
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गाँव के प्राथमिक विद्यालय में बहुत सारे बच्चे पढ़ते थे। उनमें से पूर्वी कक्षा पाँच में पढ़ने वाली एक समझदार और होशियार लड़की थी। पढ़ाई में अच्छी होने के साथ-साथ वह चित्रकारी भी बहुत सुन्दर करती थी। लेकिन उसमें एक बुरी आदत पनपने लगी थी- दूसरों की चीज़ें बिना पूछे उठा लेना।
शुरुआत में वह छोटी-मोटी चीजें जैसे- पेन्सिल या इरेजर चुपके से उठा लेती थी। जब किसी को पता नहीं चलता, तो उसे लगता कि यह तो बहुत आसान काम है। धीरे-धीरे उसकी यह आदत चोरी की लत में बदलने लगी।
आए दिन कक्षा से कुछ न कुछ चोरी होने लगा। कक्षा की अध्यापिका भी बहुत परेशान हो गयी वे बच्चों को समझाती कि, "चोरी करना बुरी बात है।" लेकिन ये चोरियाँ रुक नहीं रही थी और वह अभी तक किसी को देख नही पायी थी।
एक घटना जिसने सब बदल दिया। एक दिन कक्षा में पूर्वी की सहेली अनन्या एक बहुत ही खूबसूरत और चमकने वाली 'पेन्सिल किट' लेकर आयी। पूर्वी का मन उस किट पर आ गया। आधी छुट्टी के दौरान जब सब बच्चे खेलने बाहर चले गये, पूर्वी चुपके से क्लास में रुकी और उसने वह किट अनन्या के बैग से निकालकर अपने बैग में छिपा ली।
जब बच्चे वापस आये, तो अनन्या अपनी किट न पाकर रोने लगी। सारी जानकारी बच्चों ने अध्यापिका को बतायी। अध्यापिका ने पूरी क्लास के बैग चेक करने का फैसला किया।
पूर्वी का दिल डर के मारे जोर-जोर से धड़कने लगा। जैसे ही अध्यापिका पूर्वी के बैग तक पहुँची, पूर्वी घबरा गई और उसने डरकर सच बोलने के बजाय किट को पास बैठी एक मासूम बच्ची, रिया के बैग के पास गिराने की कोशिश की। लेकिन अध्यापिका ने उसे ऐसा करते हुए रंगे हाथों पकड़ लिया।
पूरी कक्षा के सामने पूर्वी का सिर शर्म से झुक गया। अध्यापिका पूर्वी को प्रिन्सिपल मैम के पास ले गयी। प्रिन्सिपल मैम ने पूर्वी को डाँटने के बजाय प्यार से समझाया, "पूर्वी! चोरी करने से तुम्हें कोई चीज कुछ पल के लिए मिल सकती है, लेकिन तुम अपनी सबसे बड़ी दौलत अपना चरित्र और दूसरों का भरोसा हमेशा के लिए खो देती हो। क्या थोड़े से लालच के लिए दूसरों का विश्वास तोड़ना सही है?"
पूर्वी को अपनी गलती का गहरा अहसास हुआ। उसकी आँखों से आँसू बहने लगे। उसने अनन्या से दिल से माफी माँगी और वादा किया कि वह जिन्दगी में कभी किसी की चीज बिना पूछे नहीं छुयेगी। अध्यापिका ने उसकी सच्ची माफी देखकर उसे एक मौका और दिया। उस दिन के बाद पूर्वी ने अपनी लत छोड़ दी और दोबारा कभी गलत राह नहीं चुनी।
#संस्कार_सन्देश-
ईमानदारी सबसे श्रेष्ठ गुण है। किसी दूसरे की वस्तु का लालच हमें गलत रास्ते पर ले जाता है। हमें ईमानदारी से जीवन व्यतीत करना चाहिए।
कहानीकार-
#मृदुला_वर्मा (स०अ०)
प्रा० वि० अमरौधा प्रथम
अमरौधा (कानपुर देहात)
✏️संकलन
📝टीम #मिशन_शिक्षण_संवाद
#दैनिक_नैतिक_प्रभात
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