133/2026, बाल कहानी- 7 अगस्त

#दैनिक_नैतिक_प्रभात - 133/2026
07 अगस्त 2026 (शुक्रवार)
#बाल_कहानी - #घूमने_दो_उसे
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रविवार का दिन था। सुबह का सुहावना मौसम था। एक माँ का नौ वर्षीय बेटा मोहल्ले में कभी साइकिल चलाता, कभी अपने दोस्तों के साथ दौड़ लगाता और कभी इधर-उधर घूमकर कुछ देर बाद घर लौट आता। माँ समय-समय पर उसे पानी पिलाती और फिर वह मुस्कुराते हुए बाहर खेलने चला जाता।

बेटे के पिता ने कहा, "तुम उसे डाँटती क्यों नहीं? सुबह से वह बस बाहर ही घूम रहा है।"

माँ मुस्कुराकर बोली, "उसे घूमने दीजिए। वह केवल समय नहीं बिता रहा, बल्कि जीवन को समझना सीख रहा है। बाहर की धूप उसे ऊर्जा दे रही है, बहती हवा उसे प्रकृति का एहसास करा रही है और हर पल उसे नए अनुभव मिल रहे हैं।"

माँ ने आगे कहा, "बाहर खेलते-घूमते हुए वह सीख रहा है कि किस परिस्थिति में सावधान रहना चाहिए, लोगों से कैसे व्यवहार करना चाहिए और अपने आस-पास की दुनिया को कैसे समझना चाहिए। यही अनुभव उसके भीतर छिपे कवि को शब्द देंगे, वैज्ञानिक को नए प्रश्न देंगे, चित्रकार को नई कल्पनाएँ देंगे और उसके सौन्दर्य-बोध को विकसित करेंगे।"
 
यह कहते हुए माँ कुछ क्षण रुकी, फिर कहने लगी, "रोज़ तो वह विद्यालय जाता ही है। यदि छुट्टी के दिन एक-दो घण्टे खुलकर खेल लेगा और घूमेगा, तो उसके अनुभवों का भण्डार समृद्ध होगा। यही अनुभव आगे चलकर उसके व्यक्तित्व को मजबूत बनाएँगे और उसे आत्मनिर्भर बनाएँगे।"

माँ की बातें सुनकर पिता मुस्कुराए और बोले, "सच कहती हो। तुम शिक्षक हो, इसलिए बच्चों की सीखने की प्रक्रिया को इतने अच्छे से समझती हो।"

उस दिन पिता ने भी महसूस किया कि बच्चों का सीखना केवल पुस्तकों तक सीमित नहीं होता, बल्कि प्रकृति, खेल और अनुभव भी उनके सबसे बड़े शिक्षक होते हैं।

#संस्कार_सन्देश-
बच्चों को सुरक्षित वातावरण में खेलने, घूमने और प्रकृति से जुड़ने का अवसर अवश्य दें। अनुभवों से मिली शिक्षा जीवनभर उनके व्यक्तित्व, आत्मविश्वास और रचनात्मकता को समृद्ध बनाती है।

कहानीकार-
#आशा_शर्मा (स०अ०)
यू० पी० एस० खड्डा, 
क्षेत्र- खड्डा, कुशीनगर

✏️ संकलन
📝 टीम #मिशन_शिक्षण_संवाद
#दैनिक_नैतिक_प्रभात

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