140/2026, बाल कहानी- 17 अगस्त
#दैनिक_नैतिक_प्रभात - 140/2026
*17 अगस्त 2026 (सोमवार)*
#बाल_कहानी- #आजादी_की_खुशी
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नेहा कक्षा दस में पढ़ती थी। नेहा के पापा-मम्मी बाजार से कुछ दिन पहले तोता लाये थे। तोते को पिंजरे में रखा गया था, मगर तोता पिंजरे में बिल्कुल भी खुश नहीं था। जिस दिन से तोता आया, उस दिन से वह हर समय पिंजरे को काटता रहता था।
नेहा ने कई बार कहा, "पापा...मम्मी! आप लोग इस तोते को आजाद कर दो। यह बिल्कुल भी पिंजरे में खुश नहीं है।"
इस बात पर नेहा के पिता ने कहा, "नेहा! कोई भी पक्षी जब पिंजरे में आता है तो वह कुछ दिन तक ऐसे ही परेशान रहता है फिर उसे इस पिंजरे की आदत पड़ जाएगी।" माता ने भी यही बात कही।
दो दिन बाद पन्द्रह अगस्त का पर्व आया। नेहा स्कूल जाने के लिए तैयार हो रही थी। नेहा की माँ ने कहा, "आज के दिन देश आजाद हुआ था। इसी खुशी में हम लोग शाम को घूमने चलेंगे।"
नेहा ने अपनी मम्मी से कहा, "माँ! आप आजादी मिलने से इतनी खुश हो जबकि आपने वह आजादी देखी भी नहीं थी। इस तोते के बारे में सोचो! ये तो हमारे सामने ही तड़प रहा है माँ! आपसे प्रार्थना है इस तोते को रिहा कर दो... आज इसे सच्ची आजादी दे दो।"
यह बात सुनकर नेहा की माँ भावुक को गईं। उन्होंने अपनी बेटी की बात मानकर उस तोते को छत पर ले जाकर खुले आसमान में रिहा कर दिया।
तोता खुले आसमान में उड़ गया। बेटी बोली, "माँ! इसे कहते हैं आजादी का जश्न।" और दोनों खुलकर हँसने लगे।
#संस्कार_सन्देश -
कैद में रहकर न तो इन्सान खुश रख रहता है, न ही पक्षी खुश रहते हैं।
कहानीकार-
#शालिनी (स०अ०)
प्राथमिक विद्यालय कूँड़
विकास क्षेत्र- करहल
जनपद- मैनपुरी (उ०प्र०)
✏️संकलन
📝टीम #मिशन_शिक्षण_संवाद
#दैनिक_नैतिक_प्रभात
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