137/2026, बाल कहानी- 12 अगस्त
#दैनिक_नैतिक_प्रभात - 137/2027
*12 अगस्त 2026 (बुधवार)*
#बाल_कहानी- #शैतानी_और_लापरवाही
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किसी गाँव में सुरेश कुमार नाम के एक अध्यापक थे। वह प्राथमिक विद्यालय में पढ़ाते थे। उनकी पाँच वर्षीय एक नातिन थी, उसका नाम भूमि था। वह परिवार में सभी को बहुत प्यारी थी। सब लोग उसकी हर माँग पूरी करते थे। उसे कोई किसी तरह का कष्ट नहीं होने देते थे। अगर कोई उसे डाँटता तो वह बहुत रोती थी।
वह समय पर पढ़ाई करती थी। खाना मोबाइल देखकर खाती थी। चाहे दुकान की पैकेट की चीजें हों या बिस्कुट या टाॅफी। मोबाइल चाहिए, तभी खायेगी। वह सुबह दोपहर, शाम दो-दो रोटी सब्जी या अचार से खा लेती। सुबह-शाम दो-दो घन्टे मोबाइल देखती। शाम को मुहल्ले में सहेलियों संग खेलती। सबसे बातें करती, सबसे हँसती-बोलती, ठिठोली करती, परेशान करती। सभी उसके कारण बहुत खुश रहते थे।
समय बीता, अब वह साढ़े पाँच साल की हुई। पहले वह दुकान की पैकेट की चीजें नहीं खाती थी, केवल टाॅफी या बिस्कुट ही खाती थी। अब सहेलियों को खाता देखकर वह भी खाने लगी। हालाँकि उसे सेवफल और अनार रोज दिए जाते।
अभी कुछ ही दिन हुए थे कि एक दुकानदार का नाती टाॅफी और पैकेट की चीजों के खाने के कारण अस्पताल में भर्ती हो गया था। उस दुकानदार ने सबको आगाह किया कि, "इन चीजों को कम से कम खिलाओ। मेरा नाती बीमार है, झाँसी में भर्ती है। बहुत तबीयत खराब है उसकी।" लोग सुनते और उस समय सहमत हो जाते, फिर घर जाकर भूल जाते। बच्चों को उस दुकानदार के पास न ले जाते, दूसरी जगह ले जाते। इस तरह यह सिलसिला चलता रहा।
एक दिन सुरेश की नातिन भूमि को गले में खरांश हुई। उससे पूछा तो उसने कुछ न बताया। उसे तुरन्त सुबह-शाम तुलसी जैल एक कप गर्म जल में आधा ढ़क्कन मिलाकर दिया गया और पैकेट बन्द कर टाॅफी कम दी गयी। भूमि धीरे-धीरे ठीक हो गयी। उसके बाद उसके परिवार के सभी सदस्य उसका बाहर की वस्तुओं से परहेज करने लगे।
#संस्कार_सन्देश -
आजकल इतने नये-नये जंक-फूड़ आने लगे हैं कि उन सबके कारण इन्फेक्शन होना स्वाभाविक है। हमें इनका विशेष ध्यान रखना चाहिए।
कहानीकार-
#जुगल_किशोर_त्रिपाठी
प्रा० वि० बम्हौरी (कम्पोजिट)
मऊरानीपुर, झाँसी (उ०प्र०)
✏️संकलन
📝टीम #मिशन_शिक्षण_संवाद
#दैनिक_नैतिक_प्रभात
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