summer vacation रेल चली

बालगीत

रेल  चली है  रेल  चली  summer  vacation रेल चली।
नयी  उमंगें  नयी  तरंगें,
नये-नये  उत्साह  हैं,
नानी के घर  जाने  को,
हम  सब  बच्चे  तैयार हैं।

रेल  चली हैं  रेल  चली summer  vacation  रेल चली।
आओ  चुन्चू तुम  भी  बैठो,
आओ  नोनू  तुम  भी  बैठो,
शैवी, शुभी, सौम्या, संभव,
पिहूंँ, अद्ध्या, दृश्या भी तैयार हैं।

रेल चली है रेल चली summer vacation रेल चली।
 नानी के घर  हम  जायेगें,
नये-नये  पकवान  खायेंगे,
नानी की  परियों  की दुनिया में,
हम  सब  खो  जायेगें  ।

रेल चली है रेल चली summer vacation  रेल चली।
नानी  के  गाँवों की  बगिया,
आमों के पेड़ों पर फलिया ,
बेल, पपीते, जामुन की डलिया,
लदकर   बिल्कुल   तैयार है ।

रेल चली है रेल चली summer vacation रेल चली ।
नानी  के   गाँव के भोला ,
जो बेचते  बर्फ  का  गोला,
नानी  तेरे  जादू  के  बटुआ  को,
हम  खाली  करने  को तैयार हैं।
रेल चली है रेल चली summer vacation रेल चली  ।

Summer vacation  हो  तुम  कितने  प्यारे,
हर साल  तुम  आते  हो,
प्यारी  नानी  से  मिलने  का,
एक  प्यारा सा  मौका दे  जाते  हो,
मै  हर वर्ष  तेरा करता हूँ  इन्तजार।

रेल चली है रेल चली summer vacation रेल चली ।

रचयिता
बिधु सिंह, 
सहायक अध्यापक,
प्राथमिक विद्यालय गढी़ चौखण्ड़ी, 
विकास खण्ड-बिसरख,               
जनपद-गौतमबुद्धनगर।

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