२२०~ श्रवण कुमार यादव सहायक शिक्षक पँचायत शासकीय प्राथमिक शाला कोसा संकुल केंद्र-गोरकापार ब्लॉक-गुण्डरदेही, जिला-बालोद, छत्तीसगढ़

💎🏅अनमोल रत्न🏅💎

मित्रों आज हम आपका परिचय मिशन शिक्षण संवाद के माध्यम से छत्तीसगढ़ के अनमोल रत्न शिक्षक साथी भाई श्रवण कुमार यादव जी से करा रहे हैं। जिन्होंने अपनी सकारात्मक सोच की शक्ति से सरकारी शिक्षा में जड़ें जमा चुकी है नकारात्मकता को अपने विद्यालय निकाल कर बाहर करने की सफलता प्राप्त की है जो हम जैसे हजारों शिक्षकों के लिए प्रेरक और अनुकरणीय है।

आइये देखते हैं आपके द्वारा किए गये कुछ प्रेरक और अनुकरणीय प्रयासों को:-

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🥀मेरी कहानी मेरी जुबानी🥀

प्रस्तुति :-
श्रवण कुमार यादव
सहायक शिक्षक पँचायत
शासकीय प्राथमिक शाला कोसा
संकुल केंद्र-गोरकापार
ब्लॉक-गुण्डरदेही, जिला-बालोद, छत्तीसगढ़

👉समुदाय को शाला से जोड़ा, तो मिल रहा बेहतर सहयोग।
👉सरकारी स्कूल की दर्ज संख्या में लगातार तीन वर्षों से हो रही है बढ़ोतरी।
👉"माननीय प्रधानमंत्री के अभिनव पहल परीक्षा उत्सव से प्रेरित होकर संस्था प्रमुख श्रवण कुमार यादव ने अपने शाला क्रियान्वित करते हुए कोसा स्कूल में वार्षिक परीक्षा के प्रथम दिवस समारोह पूर्वक बच्चों को सम्मानित किया गया।"
👉राष्ट्रीय स्तर पर शिक्षा के क्षेत्र में क्रियाशील "The Teacher App" एवं अज़ीम प्रेमजी फॉउंडेशन द्वारा प्रकाशित शैक्षिक पत्रिका "पैडगरी" में कोसा में क्रियान्वित सामुदायिक सहभागिता को स्थान मिल चुका है।

👉ग्राम कोसा : एक नजर में👈

छत्तीसगढ़ के बालोद जिले के सबसे अंतिम छोर में बसे ग्राम कोसा की कुल आबादी लगभग 800 है। कोसा एक अनुसूचित जाति बाहुल्य ग्राम है। यहाँ जीवनयापन की मुख्य साधन कृषि मजदूरी है, जो सीमित मात्रा में होने की वजह से यहां की आर्थिक स्थिति कमजोर श्रेणी अंतर्गत आता है। अभिभावकों में अल्प साक्षरता की वजह से यहां की शैक्षणिक वातावरण भी निम्न स्तर का पाया गया था।

👉तत्कालीन परिदृश्य👈 (2008-2012-13)

जिस समय मेरी (श्रवण कुमार यादव) प्रथम पदस्थापना इस स्कूल में हुई। उस समय इस स्कूल में काफी समस्याएं थी, जिनमें स्कूल में आवश्यक संसाधनों की कमी, बच्चों की अनियमित उपस्थिति प्रमुख था। इसके अलावा समुदाय का स्कूल से जुड़ाव बिल्कुल भी नहीं था। इन कमियों की पूर्ति हेतु मेरे द्वारा काफी चिंतन मनन किया जाता था।

👉मेरा प्रयास (2013-2017)👈

इसी बीच सन-2013 में मुझे प्रभारी शिक्षक का दायित्व सौंपा गया। तब मेरे द्वारा सर्वप्रथम समुदाय को शाला से जोड़ने हेतु प्रयास किया गया।
👉1- इसके लिए शाला प्रबन्धन समिति को क्रियाशील किया गया। नियमित बैठकें किए जाने लगा। स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों की अभिभावकों विशेष कर माताओं को स्कूल में आमंत्रित कर उनके बच्चों की स्तर पर चर्चा किया गया एवं घरों में अपने बच्चे की पढ़ाई पर ध्यान देने हेतु विशेष जोर दिया जाने लगा।
👉2-शाला स्तर पर विभिन्न आयोजनों जैसे:-
👉महिला सशक्तिकरण हेतु *माता उन्मुखीकरण,*
👉माता-पिता एवं परिवार के प्रति सम्मान देने के संस्कार हेतु *मातृ पितृ पूजन दिवस,*
👉ग्राम वरिष्ठ नागरिकों के सम्मान हेतु *विश्व वृद्धजन दिवस,*
👉महिलाओं की सम्मान हेतु *विश्व महिला दिवस,*
👉बच्चों व अभिभावकों की भागीदारी से पढ़ने हेतु एक उचित वातावरण निर्माण हेतु *वर्ड रीड अलाउड डे,*
👉विभिन्न *स्वास्थ्य एवं स्वच्छता जागरूकता* कार्यक्रमों,
👉छत्तीसगढ़ के विभिन्न तीज-त्योहारों की महत्व बताने के लिए *ग्राम के बुजुर्गों को स्कूल में अतिथि वक्ता* के रूप में आमंत्रित करना।
👉*सामाजिक अंकेक्षण कार्यक्रम,*
👉ग्रामीण *खेलकूद*
👉*"नशामुक्ति अभियान"*,
👉*"बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ"* कार्यक्रम के साथ-साथ सभी आयोजनों/गतिविधियों/कार्यक्रमों के माध्यम से समुदाय की सहभागिता सुनिश्चित करने का भरपूर प्रयास किया गया।
👉हमारे देश के प्रधानमंत्री माननीय नरेन्द्र मोदी जी द्वारा बच्चों को तनावमुक्त बनाए रखने के लिए परीक्षा उत्सव नामक एक अभिनव पहल किया गया। जिससे प्रभावित होकर संस्था प्रमुख श्रवण कुमार यादव ने इस वर्ष की वार्षिक परीक्षा के प्रथम दिवस बच्चों को परीक्षा के भय व तनाव से मुक्त रखने बच्चों का समारोहपूर्वक सम्मान किया गया।
👉*इसके साथ साथ शाला में शैक्षणिक वातावरण निर्मित करने का भी विशेष पहल किया गया।*
👉इस तरह पहल के अलावा *मेरे द्वारा शाला लगने के पूर्व एवं शाला के बाद स्कूल आते-जाते नियमित रूप से समुदाय से मिल कर उनसे संपर्क* को बनाए रखा गया।

👉सार्थक परिणाम👈

मेरे ऐसे प्रयासों से धीरे-धीरे समुदाय द्वारा स्कूल को सहयोग दिए जाने लगा, साथ ही अल्प साक्षर होने के बाद भी स्कूल की शैक्षणिक वातावरण से प्रभावित होने की वजह से उनमें स्कूल के प्रति सकारात्मक सोच विकसित होने के परिणामस्वरूप अब मेरे *स्कूल की नियमित उपस्थिति तो बढ़ी ही है, इसके अलावा विगत तीन वर्षों से स्कूल की दर्ज संख्या में भी बढ़ोतरी हुई है।*

इसके अलावा अब शाला स्तर की सभी आयोजनों/क्रियाकलापों/गतिविधियों में समुदाय द्वारा पूर्ण सहभागिता दिया जाता है।

👉विशेष उपलब्धि👈

शाला और समुदाय के बीच बेहतर संबंध बनने का सबसे अधिक लाभ माता अभिभावकों को हुआ है। *जिन महिलाओं को घर से बाहर निकलना सम्भव नहीं रहता था, अब ऐसी महिलाएं स्कूल की गतिविधियों से प्रेरित होकर अपने घरों से बाहर निकल कर समाज की मुख्यधारा की हिस्सा बनते हुए ग्राम की सामाजिक, रचनात्मक कार्यों में भी अपनी सहभागिता देने हेतु विभिन्न संगठनों जैसे महिला कमाण्डों, महिला स्वसहायता समूह, भारतमाता वाहिनी समिति इत्यादि का गठन किया जा कर एक नई सोच के साथ ग्राम विकास में सक्रिय भागीदारी निभा रही है।*

इसके अलावा इन महिलाओं द्वारा आर्थिक संबलता हेतु माइक्रो फाइनेंस एवं अन्य लघु उद्योग स्थापना हेतु प्रोजेक्ट निर्माण कर क्रियान्वयन की संभावनाएं भी तलाश रही है।


👉मार्गदर्शन के रूप में बनी पहचान👈

अब शासकीय एक प्राथमिक शाला एक मार्गदर्शन केंद्र के रूप में स्थापित हो रहा है, जहां समुदाय, ग्रामीण, युवा, महिलाओं सहित आसपास के शिक्षकगण के द्वारा सामाजिक, व्यक्तिगत सलाह व मार्गदर्शन हेतु पहुँचते है। उसके अलावा यह शाला विभिन्न शालाओं के लिए प्रेरक शाला की भूमिका भी निभा रही है जहां अनेकों जिले व ब्लॉक के नवाचारी शिक्षकगण कोसा में क्रियान्वित हो रही गतिविधियों को जानने समझने पहुँच रहे है।


👉ट्यूनिंग ऑफ स्कूल👈

अभी वर्तमान सत्र में लैंग्वेज एण्ड लर्निंग फॉउंडेशन नई दिल्ली के प्रतिनिधि श्रीमती अनुराधा गुप्ता जी, जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डाइट) जिला दुर्ग के व्याख्याता श्री आर के चन्द्रवँशी जी द्वारा कोसा स्कूल का अवलोकन किया गया। इनके अलावा एबीईओ श्रद्धा ठाकुर, एबीईओ सीमा नायक, सीएसी संदीप कुमार जोशी, कवर्धा जिले के नवाचारी शिक्षक रूपेन्द्र गजपाल, बालोद जिले के प्राइमरी स्कूल चिटौद (गुरूर) के नवाचारी शिक्षक ईश्वरी कुमार सिन्हा, सरस्वती शिशु मंदिर केशकाल, जिला कोंडागांव की आचार्य राजेश्वरी यदु, प्राइमरी स्कूल सकरौद के रेखलाल साहू, सुरेन्द्र साहू, मिडिल स्कूल सकरौद के मिथिलेश साहू, मिडिल स्कूल तिलोदा के संजीत कुमार ठाकुर, प्राइमरी स्कूल सिर्री के विनय गोस्वामी, मिर्ज़ा अरमान बेग, प्राइमरी स्कूल तमोरा के खेलेंद्र कुमार चन्द्राकर, प्राइमरी स्कूल पांगरी के बिंदेश्वरी चन्द्राकर, जागेश्वर पटेल, मिडिल स्कूल तमोरा के प्रधानपाठक मनोज कुमार ठाकुर, छुईखदान ब्लॉक के ईश्वरी गेन्डरे इत्यादि ने कोसा स्कूल का अवलोकन करते हुए एवं कांकेर लोकसभा सांसद माननीय विक्रमदेव उसेण्डी एवं असम राज्य के पूर्व मुख्य सचिव धीर झींगरण (सेवानिवृत्त आईएएस) निर्देशक, एलएलएफ नईदिल्ली के द्वारा पत्र प्रेषित कर कोसा स्कूल में क्रियान्वित कार्यक्रमों की सराहना कर अपनी बहुमुल्य मार्गदर्शन दे चुके है। कोसा स्कूल की सफलता को कहानी शिक्षा के क्षेत्र राष्ट्रीय स्तर पर क्रियाशील *"The Teacher App"* एवं अज़ीम प्रेम जी फॉउंडेशन द्वारा प्रकाशित शैक्षिक पत्रिका *"पैडगरी"* में स्थान दिया जा चुका।

इस स्कूल में सकारात्मक वातावरण निर्माण में स्कूल के शिक्षकगण श्रवण कुमार यादव, श्रीमती संध्या साहू, श्रीमती झमिक कुर्रे, सरपंच श्रीमती सोहद्रा राजेन्द्र चन्द्राकर, शाला प्रबन्धन समिति के अध्यक्ष श्री सुरेश कुमार डाहरे, रसोइया लक्ष्मी यादव, लता यादव, अंशकालीन सफाईकर्मी मनमोहित लाल डाहरे का विशेष योगदान रहा है।
धन्यवाद
🙏🙏🙏🙏🙏🙏























बहुत-बहुत धन्यवाद सर
मिशन शिक्षण संवाद परिवार की ओर से आपको सहयोगी विद्यालय परिवार सहित उज्जवल भविष्य की कामनाओं के साथ हार्दिक शुभकामनाएं!

👉 मित्रों आप भी यदि बेसिक शिक्षा के सम्मानित शिक्षक हैं या शिक्षा को मनुष्य जीवन के लिए महत्वपूर्ण मानते हों और शिक्षा का प्रचार-प्रसार करना अपना कर्तव्य मानते है तो इस मिशन शिक्षण संवाद के माध्यम से शिक्षा के उत्थान एवं शिक्षक के सम्मान की रक्षा के लिए आपस में हाथ से हाथ मिला कर, मिशन शिक्षण संवाद के अभियान को सफल बनाने के लिए इसे अधिक से अधिक लोगों तक पहुँचाने में सहयोगी बनकर, शिक्षक स्वाभिमान की रक्षा के लिए आगे बढ़ें। हमें विश्वास है कि अगर आप सब अनमोल रत्न शिक्षक साथी हाथ से हाथ मिलाकर संगठित रूप से आगे बढ़े तो निश्चित ही बेसिक शिक्षा से नकारात्मकता की अंधेरी रात का अन्त होकर रोशनी की नयी किरण के साथ नया सवेरा अवश्य आयेगा। इसलिए--

👫 आओ हम सब हाथ मिलायें।
बेसिक शिक्षा का मान बढ़ायें।।

👉🏼 नोटः- यदि आप या आपके आसपास कोई बेसिक शिक्षा का शिक्षक साथी प्रेरक कार्य कर शिक्षा एवं शिक्षक को सम्मानित स्थान दिलाने में सहयोग कर रहा है तो बिना किसी संकोच के अपने विद्यालय की उपलब्धियों और गतिविधियों को हम तक पहुँचाने में सहयोग करें। आपकी ये उपलब्धियाँ और गतिविधियाँ हजारों शिक्षकों के लिए नयी ऊर्जा और प्रेरणा का काम करेंगी। इसलिए बेसिक शिक्षा को सम्मानित स्थान दिलाने के लिए हम सब मिशन शिक्षण संवाद के माध्यम से जुड़कर एक दूसरे से सीखें और सिखायें। बेसिक शिक्षा की नकारात्मकता को दूर भगायें।

उपलब्धियों का विवरण, ऑडियो, वीडियो और फोटो भेजने का Whatsapp No.- 9458278429 एवं ईमेल- shikshansamvad@gmail.com है।

साभार: मिशन शिक्षण संवाद उ० प्र०

निवेदन:- मिशन शिक्षण संवाद की समस्त गतिविधियाँ निःशुल्क, स्वैच्छिक एवं स्वयंसेवी हैं। जहाँ हम आप सब मिलकर शिक्षा के उत्थान और शिक्षक के सम्मान के लिए प्रयास कर रहे हैं। इसलिए यदि कहीं कोई लोभ- लालच या पद प्रतिष्ठा की बात कर, अपना व्यापारिक हित साधने की कोशिश कर रहा हो, तो उससे सावधान रह कर टीम मिशन शिक्षण संवाद को मिशन के नम्बर-9458278429 पर अवश्य अवगत करा कर सहयोग करें।

धन्यवाद अनमोल रत्न शिक्षक साथियों🙏🙏🙏
विमल कुमार
कानपुर देहात
12/04/2018

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