स्वामी विवेकानन्द
ज्ञान रक्षा करता है हम सबकी।
स्वामी विवेकानन्द जी ने कहा है।।
भव्य व्यक्तित्व और महान विचारक।
युवाओं के प्रेरणास्रोत युग प्रवर्तक।।
शिकागो सम्मेलन में देश को महान बनाया।
युवाओं उठो, जागो यह आह्वाहन करवाया।।
मुखमंडल दमके जैसे हो तेज़ आभा।
व्याख्यान ऐसे, जैसे हो रश्मि प्रभा।।
आधुनिक युग के प्रवर्तक, थे संस्कारी।
उनके पदचिन्हों चलते, लोग बने परोपकारी।।
जहाँ देते भाषण, मंत्रमुग्ध होते नर और नारी।
लेते जीवनदर्शन की सीख, बनते कल्याणकारी।।
पर सूरज को अस्त होना था, हो गया।
4 जुलाई,1904 को महान पुरुष सदा को सो गया।।
विश्वनाथ जी और भुबनेश्वरी देवी जी का लाडला था।
आध्यात्म और संस्कृति से पूर्ण स्वामी रामकृष्ण परमहंस का चहेता था।।
रचयिता
सीमा अग्रवाल,
सेवानिवृत्त सहायक अध्यापिका,
पूर्व माध्यमिक विद्यालय हाफ़िज़पुर उबारपुर,
विकास क्षेत्र - हापुड़,
जनपद - हापुड़।
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