कारगिल शहीद दिवस
शान तिरंगे की रखने को, वीरों ने तब ठानी थी,
कारगिल विजय पाने को, शहीदों ने कुर्बानी दी।
किया बलिदान देश पर, कितनों ने अपना बांकापन,
शौर्यवीर, युद्धवीरों को, आजादी बिगुल बजानी थी।
60 दिन चले युद्ध में, 26 जुलाई 1999 को इतिहास रचा,
सशस्त्र संघर्ष में वीरों को, हर हाल में विजयश्री पानी थी।
क्रूड दुश्मन आघात किया, वीरों को ललकार दिया,
सौ पर एक भारी शेरो ने, छाती चढ़कर धूल चटा दिया।
अलग-अलग हैं भाषा-भाषी, वीर शहीद कहलाये वो,
भारत माँ का चोला पहन, हिमालय पर झंडा लहराए वो।
धरती से अम्बर तक होती, भारत की जय जयकार है, कारगिल विजय दिवस पर, शहीदों को नमन बारम्बार है।
रचयिता
वन्दना यादव "गज़ल"
सहायक अध्यापक,
अभिनव प्रा० वि० चन्दवक,
विकास खण्ड-डोभी,
जनपद-जौनपुर।

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