विश्व जनसंख्या दिवस

जनसंख्या का यूँ तेजी से बढ़ना,

जनाब, इसे एक मजाक ना समझना।


बढ़ती जनसंख्या ने विश्व में दूसरे स्थान पर पहुँचा दिया,

पड़ी अर्थव्यवस्था खतरे में, बेरोजगारी को बढ़ा दिया।


जंगल कटने लगे, पेड़ उजड़ने लगे,

वन्यजीवों के वास उजड़ने लगे।


इस कोलाहल में भ्रष्टाचार पनपने लगे,

बीमारियों के संग प्रदूषण भी बढ़ने लगे।


धर्म के नाम पर भी जनसंख्या को बढ़ाया है,

राजनीति है इसमें भी कहीं, सही फरमाया है।


इस वृद्धि में अंधविश्वास भी गहराया है,

अशिक्षा के कारण यह संकट छाया है।


आओ फिर से शिक्षा की अलख जगाएँ,

जनसंख्या वृद्धि के दुष्परिणाम गिनाएँ।


ग्लोबल वार्मिंग से इस धारा को बचाएँ,

स्वस्थ सुरक्षित समाज बनाएँ।


रचयिता

भारती मांगलिक,

सहायक अध्यापक,

कम्पोजिट विद्यालय औरंगाबाद,

विकास खण्ड-लखावटी,

जनपद-बुलंदशहर।



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