शहीद मंगल पांडे

बलिया के नगवां में चमका एक सितारा,

19 जुलाई 1827 को आह्लादित जग सारा।

ईस्ट इंडिया कंपनी की जिसने जड़ें हिला दीं,

शहादत ने इनकी, क्रांति को दिया था इशारा।।


क्रांति का पहला बीज था बोया,

अंग्रेजों की हर चाल को धोया।

193 वी जयंती आज हम मनाएँ,

इतिहास के पन्नों में अमर शहीद खोया।।


29 मार्च 1857 को बैरकपुर में किया हमला,

सैनिक के तौर पर हुए भर्ती, गाया ना अंग्रेजी जुमला।

अंग्रेजों के खिलाफ मोर्चा उन्होंने खोला,

भारतीयों के प्रति क्रूरता से दिल था पिघला।।


"मारो फिरंगी को" नारा इन्होंने दिया था,

प्रथम क्रांतिकारी का दर्जा लिया था।

बिगुल क्रांति का पूरे जग में बजा था,

18 अप्रैल का दिन फाँसी के लिए चुना था।।


क्रांति के इतिहास में नाम अमर रहेगा,

बच्चा-बच्चा इनकी कुर्बानी को कहेगा।

कर जोर वंदन करें ऐसे वीर को हम,

समय से पहले फाँसी चढ़ा, लाडला रहेगा।।


रचयिता

नम्रता श्रीवास्तव,

प्रधानाध्यापिका,
प्राथमिक विद्यालय बड़ेह स्योढ़ा,
विकास खण्ड-महुआ,
जनपद-बाँदा।



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