हरेला

आया आया आया

देखो फिर से हरेला आया

हर वर्ष की तरह

अपने साथ हरियाली लाया।

चारों तरफ हरियाली है

धरती ने नई छवि पाई है

रंग-बिरंगे फूल खिल गये

धरती माँ का श्रृंगार कर रहे

अद्भुत छटा बिखरी है

आई मन भावन हरियाली है।

बादलों की घटा छाई है

रिम झिम -रिम झिम वर्षा ने

धरती की प्यास बुझाई है 

भीग गये सब खेत खलिहान 

भीगे सारे बाग बगीचे

तर हो गया देखो घर का आँगन

फिर भी ऋतु तो है ये मन भावन

मोर मगन हो नाच रहे हैं

खुश होकर बल खा रहे हैं

नदी, तालाब भर गये हैं जल से 

इंतजार  था, वर्षा का कब से

चारों तरफ छाई हरियाली 

धरती पर रौनक है आई

झर - झर  झर- झर झरने बह रहे

मानो कोई कहानी कह रहे।

साथ चलो एक सन्देश पहुँचाये 

आओ हम भी वृक्ष लगाएँ

मिल कर हरेला त्योहार मनाएँ।

आओ मिलकर करें वृक्षारोपण 

अपनी वनसंपदा को बढ़ाएँ।

जब रहेगें ये वन और जंगल

तभी तो होगा मानव का मंगल। 


रचयिता
दीपा कर्नाटक,
प्रभारी प्रधानाध्यापिका,
राजकीय प्राथमिक विद्यालय छतौला,
विकास खण्ड-रामगढ़,
जनपद-नैनीताल,
उत्तराखण्ड।

Comments

Total Pageviews