विश्व हिंदी दिवस
अ अज्ञानी से लेकर के,
ज्ञ से ज्ञानी जो बनाए।
वो कोई और नहीं है भाषा,
हिंदी मातृभाषा इसलिए कहलाए।।
पैदा जब हम हुए,
मुँह से निकली अंगा।
हिंदी हमारी इतनी पावन,
जैसे माँ गंगा।।
मान हमारा हिंदी से है,
ज्ञान हमारा हिंदी से है।
आज विश्व जो मना रहा है,
वो विश्व दिवस भी हिंदी से है।।
आओ मिलकर प्रण करें,
इसको हम सहेजेंगे।
हिंदी से हिंदुस्तान सजा है,
छटा यहीं बिखेरेंगे।।
रचयिता
अंशिका शर्मा,
सहायक अध्यापक,
प्राथमिक विद्यालय नौजरपुर,
विकास खण्ड-निधौली कलाँ,
जनपद-एटा।

बहुत अच्छी कविता ।ऐसे ही प्रयास करती रहो
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