गुरु हर राय

16 जनवरी 1630 को पंजाब में प्रकटे,

पिता गुरुदत्त माता निहाल कौर कहते।

शांत व्यक्तित्व से लोगों को प्रभावित करते,

आत्म सुरक्षा को शस्त्र आवश्यक बताते।।


आध्यात्मिकता और राजनीति का संगम,

विचारों से हुआ मुश्किलों का आगम।

सिख योद्धाओं में किए प्राण संचरण,

महापुरुष एवं योद्धा का था आगमन।।


मोहम्मद यार बेग खान को किया पराजित,

दिलेर बहादुरी से था उत्तर घोषित।

भ्रष्ट मसंद पद्धति में किया सुधार,

आध्यात्मिक लोगों को किया नियुक्त।।


14 वर्ष की आयु में बने सप्तम नानक,

गुरु गोविंद राय के प्रबल समर्थक।

सिखों के सातवें गुरु का पद पाया,

6 अक्टूबर 1661 में ज्योति ज्योत समाया।।


रचयिता
नम्रता श्रीवास्तव,
प्रधानाध्यापिका,
प्राथमिक विद्यालय बड़ेह स्योढ़ा,
विकास खण्ड-महुआ,
जनपद-बाँदा।

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