स्वामी विवेकानन्द

राष्ट्र नायक, राष्ट्र उन्नति पथ के आध्यात्मिक तत्व।

दंभ द्वेष से दूर रह, पुष्पित ज्ञान सुमन खिलाया।


आशावादी सोच रख, गहन निराशा को दूर भगाया।

बिन लक्ष्य प्राप्ति के, कभी  न रुकना सिखलाया।


जन जन को, लक्ष्य प्राप्ति का, मूल मंत्र बताया।

मातृभूमि के नरेंद्र, विश्व के गुरु विवेकानंद।


जिंदगी को फूलों की तरह,  महकाना बताया।

लांघ मुश्किलों को, हौंसले को बढ़ाना बताया 


गरीब लाचार के जख्मों पर मरहम लगाया।

युवाओं को, ज्योत ज्ञान बाँटना सिखलाया।


पाकर  मान सम्मान, दिलों में बसना बताया।

युवाओं के प्रेरणा स्रोत्र, स्वामी विवेकानन्द जी।


तरुण तपस्वी को नमन बारम्बार, सीस मैंने नवाया


रचनाकार
अंजनी अग्रवाल,
सहायक अध्यापक,
पूर्व माध्यमिक विद्यालय सेमरुआ,
विकास खण्ड-सरसौल, 
जनपद-कानपुर नगर।



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