नव वर्ष

नव वर्ष है आया,

एक नई आशा, उम्मीद है लाया।

आओ नई उड़ान भरेंगे,

सपनों को साकार करेंगे।


बुरा समय जो बीत गया,

मानो काली रात गई।

अब याद उसे कौन करता है,

सूर्य की प्रभा से तमस को जाना पड़ता है।


बड़ा कदमों को आगे,

प्रयास निरंतर करना है।

नूतन वर्ष का स्वागत,

दृढ़ संकल्प से करना है।


ज्यों धरती का श्रृंगार,

पुष्प सदा से करते हैं।

विद्या के मंदिर का श्रृंगार,

छात्र सदा ही करते हैं।


नूतन वर्ष में खुल जाएँ,

विद्या मंदिर के द्वार।

टन- टन की घंटी सुननी है,

ज्ञान की उपासना बच्चों को करनी है।


2021 का नूतन वर्ष,

खुशियाँ कुछ ऐसी लाएँ। 

विद्यालय के आँगन में ,

बच्चों का कौतूहल लाये। 


बजे प्रार्थना की घंटी,

तू ही राम है, तू ही रहीम से।

कर्तव्य से परिपूर्ण प्रतिज्ञा,

राष्ट्रभक्ति को बढ़ाता जन -गण -मन


पुष्प लिए करती हूँ स्वागत,

सुमन लिए करती हूँ स्वागत।

नव वर्ष तुम्हारा,

नूतन वर्ष तुम्हारा


रचयिता 
रजनी देवी,
सहायक अध्यापिका, 
राजकीय प्राथमिक विद्यालय कौब,
विकास खण्ड- नारायणबगड़,
जनपद-चमोली,
उत्तराखण्ड।



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