रंगों की दुनिया
नीले -नीले आसमान में
पीला -पीला सूरज निकला।
काली -काली रात गई,
जग में उजाला फैला।
हरे -हरे पेड़ों पर तब,
रंग-बिरंगी चिड़िया बोली
गुलाबी कमल की,
पंखुड़ियों ने भी आँखें खोली।
सफेद बगुला देखो,
सतरंगी मछली को पकड़े।
काली बिल्ली मौसी,
भूरे चूहे पर छपटे।
पीला गेंदा चमक उठा,
लाल गुलाब का सुगंध बिखरा।
सफेद बेला से चमकी डाली,
सूरजमुखी का भी फूल खिला,
रंग छुपे हैं चारों ओर,
कुछ तुम भी जानो।
अपने घर में छुपे हुए,
रंगों को पहचानो।
रंगों से तुम रंग मिलाओ,
नए- नए रंग बनाते जाओ,
प्रकृति में है सब रंग छिपे,
बस इनको तुम ढूँढते जाओ
रचयिता
सुधा गोस्वामी,सहायक शिक्षिका,
प्रथमिक विद्यालय गौरिया खुर्द,
विकास क्षेत्र-गोसाईंगंज,
जनपद-लखनऊ।

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