हिंदी हैं हम
हम उस देश के वासी हैं
जिसकी राष्ट्र बोली हिंदी है।।
आओ हम कुछ कर दिखाएँ
हिंदी भाषा सबको पढ़ाएँ।।
ये हमारी राष्ट्र भाषा है।
ये हमारी सुसंस्कृति की दाता।।
रस अलंकार उपमा से सुसज्जित।
व्याकरण से मालामाल है हिंदी
इसका मान सम्मान बढ़ाएँगे
देश विदेश में परचम लहराएँगे।।
अपनी हिंदी भाषा को अपनाओ
गुड मॉर्निंग नहीं
नमस्कार करना बच्चों को सिखाओ
हिंदी में है शब्द भंडार
नगण्य अतुल्य अपरम्पार।।
हर रिश्ते के नाम पहचान अलग 2
मामा मामी, चाचा चाची, मौसा मौसी
दादा-दादी, नाना-नानी, ताउ-ताई।।
सबकी स्पष्ट पहचान अलग है
राम, कृष्ण, गौतम, कबीर की
मातृभूमि है ये।।
सन्तों की मधुर वाणी से
भारत की हिंदी गुंजायमान है।।
जनमानष की भाषा है।
राष्ट्र एकता की प्राणदाता है।।
हिंदी हमारी जान है
हिंदी हमारी शान है
हिंदी पर हमको गर्व बहुत।।
रचयिता
माधुरी पौराणिक,
सहायक अध्यापक,
पूर्व माध्यमिक विद्यालय हस्तिनापुर,
विकास खण्ड-बड़ागाँव,
जनपद-झाँसी।

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