नव वर्ष
नव वर्ष धीरे-धीरे ऐसे आना,
नवकोंपल सी जग में खिलना
सुंदर-सुंदर रंग बिखेरना,
सबके मन को हर्षाना।
नव वर्ष तुम कुछ ऐसे आना।
सबके मुँह से मास्क हटाना,
मन्द-मन्द पवन बन तुम आना।
महामारी को दूर भागना,
सब को तंदरुस्ती दे जाना।
नव वर्ष तुम कुछ ऐसे आना।
जिसने अपना लाल गँवाया,
उस माँ को ढांढस देना।
जिस पिता ने पुत्र गँवाया,
उसको भी सबल बनाना।
नव वर्ष तुम कुछ ऐसे आना।
जिन देहलियों के बुझ गये दीप
उनको आशाओं के उजाले देना।
जिनके माता-पिता छोड़ चले,
उनको अपना आशीष दे जाना।
नव वर्ष तुम कुछ ऐसे आना।
बन्द पड़े जो विद्यालय के पट,
उनको भी खुलवाते जाना।
अलसा गए जो बच्चे घर में,
खुली हवा में उछलकूद करवाना।
नव वर्ष तुम कुछ ऐसे आना
सबके घर का चूल्हा जले
फिर सबको रोजगार दे जाना।
आपसी प्रेम सद्भाव बढ़े सभी में
सबको मिलकर बाँधे रखना।
नव वर्ष तुम कुछ ऐसे आना
सबका मान सम्मान हो जग में
ऊँच नीच का भेद न रखना।
कदम से कदम मिलाकर चलें,
अमीर गरीब की खाई न देना।
नव वर्ष तुम कुछ ऐसे आना।
तमस की कालिमा छायी जग में,
नवल प्रभात की रश्मि बन हर लेना।
जगमग सबका जीवन करके,
सबका दामन खुशियों से भर लेना।
नव वर्ष तुम कुछ ऐसे आना।
रचयिता
सन्नू नेगी,
सहायक अध्यापक,
राजकीय कन्या उच्च प्राथमिक विद्यालय सिदोली,
विकास खण्ड-कर्णप्रयाग,
जनपद-चमोली,
उत्तराखण्ड।

अति सुंदर दीदी💕
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