बारह महीने एक वर्ष के

बारह महीने एक वर्ष में, होते हैं आओ बतलाऊँ,
किसके बाद कौन सा माह, आता है क्रम से सिखलाऊँ।
सबसे पहला मास जनवरी, ठिठुर-ठिठुर कटते हैं दिन,
नूतन वर्ष मनाते सब मिल, लम्बी रातें छोटे दिन।
मास दूसरा फ़रवरी होता, सबसे कम होते हैं दिन,
सिहरन भरी रात कटती है, धूप गुनगुनी लिए हुए दिन।
मार्च मास तीसरा होता, बसंत छाए चारों ओर,
मोर, पपीहा, कोयल गायें, अबीर-गुलाल उड़े चहुँओर।
चौथा मास अप्रैल कहाये, पहला दिन मूर्ख दिवस मनायें,
न गर्मी, न ठण्ड सताये, मौसम सबके मन को भाये।
मास पाँचवा मई होता है, प्रथम दिन मजदूर दिवस मनायें,
सूरज और चमकता जाए, गर्मी पल-पल तेज बढ़ाये।
जून मास होता छठवाँ है, प्रचण्ड धूप का कोप बढ़े नित,
लम्बे-लम्बे दिन होते हैं, रातें होतीं छोटी प्रतिदिन।
सातवाँ मास जुलाई होता, आगमन मानसून का होता,
काले मेघा नभ में छाते, उमड़-घुमड़ कर जल बरसाते।
मास अगस्त आठवाँ होता, दिखता जल ही जल चहुँओर,
कभी धूप कभी छाँव है होती, मोर पपीहा करें हैं शोर।
नवाँ मास आता है सितम्बर, झूमें धरती के संग अम्बर,
वर्षा होने लगती कम-कम, इंद्रधनुषी रंग बिखरे धरा पर।
दसवाँ होता माह अक्टूबर, नित नव नूतन तीज-त्यौहार,
हो मतवाले झूमते गाते, खुश होकर सब संग परिवार।
ग्यारहवाँ मास नवम्बर आता, ठण्ड गुलाबी संग में लाता,
खिले गुनगुनी धूप सुनहली, रातें कटती ओढ़ रजाई।
अंतिम माह दिसम्बर का है, ओढ़े धरा कोहरे की चादर,
सूरज खेले आँख मिचौली, सरसर ठण्डी बहे बयार।
जनवरी, मार्च, मई और जुलाई, अगस्त, अक्टूबर संग दिसम्बर,
छोड़ फरवरी अट्ठाइस वार, दिवस होते सबमें इक्कतीस।
अप्रैल, जून, अगस्त, सितम्बर,  संग नवम्बर होते दिन तीस।

रचयिता
सुप्रिया सिंह,
इं0 प्र0 अ0,
प्राथमिक विद्यालय-बनियामऊ 1,
विकास क्षेत्र-मछरेहटा,
जनपद-सीतापुर।

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