महिला सशक्तीकरण 178, रंजना अवस्थी फतेहपुर

*👩‍👩‍👧‍👧महिला सशक्तीकरण विशेषांक-178*

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*मिशन शिक्षण संवाद परिवार की बहनों की संघर्ष और सफ़लता की कहानी*

(दिनाँक- 22 दिसम्बर 2019)

 *नाम:-रंजना अवस्थी*

*पद :-सहायक अध्यापिका*

विद्यालय:- पू०मा०वि० बेंती सादात विकास खण्ड-भिटौरा, जनपद- फ़तेहपुर

*सफलता एवं संघर्ष की कहानी :-*

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मैं रंजना अवस्थी

सहायक अध्यापिका

पू०मा०वि० बेंती सादात विकास खण्ड-भिटौरा, जनपद- फ़तेहपुर से।


 मेरी नियुक्ति 23 मार्च-1999 को प्राथमिक विद्यालय चक काजीपुर, विकास खण्ड- असोथर, जिला-फतेहपुर के अति पिछड़े इलाके में हुई। जो मेरी इच्छा के विरुद्ध थी, पर मम्मी पापा के कहने पर जब तक कहीं औऱ नियुक्ति नहीं होती तब तक कर लो फिर छोङ देना।

 मैं टीचर नहीं बनना चाहती थी, पर मैने वहाँ देखा कि बच्चे पढ़ना   चाहते थे वो सीखना चाहते थे, ये मेरे लिए बहुत ही अच्छी बात थी। मैं उनके  साथ मित्रवत हो गई बातचीत औऱ खेल को ही मैंने अपना जरिया बनाया। उनके निश्छल स्वभाव व प्यार ने मुझको ऐसा बाँधा कि मैं भूल गई कि मुझे टीचर नहीं बनना था।


👉🏻 2002 में प्राथमिक विद्यालय नरतौली विकास खण्ड बहुआ में स्थानान्तरण के उपरांत आयी। इस विद्यालय का शैक्षिक माहौल बहुत ही अच्छा था। हेड मास्टर श्री सिवाधार जी एक अनुशासन प्रिय व आदर्श अध्यापक थे। उनसे मुझे बहुत कुछ सीखने को मिला। शैक्षिक माहौल अच्छा था, इसलिए मैंने वहाँ प्रार्थना के बाद विचार औऱ प्रेरक प्रसंग पहले अध्यापकों द्वारा फिर बच्चों को कहने के लिए प्रोत्साहित किया योग व स्काउट तालियों का प्रयोग बहुत ही अच्छा साबित हुआ। अभी तक मैंने कोई भी अभिभावक सम्पर्क नहीं किया था, लेकिन बच्चों के माध्यम से मैं हर घर की प्रिय बन गई थी। बच्चों की अच्छी आदतें व जो प्रेरक प्रसंग प्रार्थना के समय उनकों सुनाये जाते थे उसकी चर्चा वो अपने घर में करते थे।

👉🏻 इसी बीच विद्यालय में पुस्तकालय के लिए पुस्तकें व बच्चों के लिए झूले आये। पुस्तकालय का प्रभार मुझे मिला।

👉🏻 पुस्तकालय की किताबों ने मेरे लिए संजीवनी का कार्य किया। इन  किताबों के माध्यम से मैंने बच्चों से चित्र एवं छोटे-छोटे लेख लिखवाने शुरू किये। बच्चों पर इसका अच्छा असर हुआ।

👉🏻 राष्ट्रीय पर्वों में बच्चे अपने आप से नाटक बनाकर उसका मंचन करने लगे वह मुझे आज भी याद है जैसे माँ की ममता, हंस किसका, फलों का राजा कौन, तक धिनक धिन-धिन आदि।

👉🏻 2008 में मेरा प्रोमोशन यू०पी०एस० बेती सादात विकास खण्ड- भिटौरा में विज्ञान शिक्षिका के रूप में हुआ। मैं जिस विद्यालय से आई थी उसकी तुलना में बच्चों का मिजाज अच्छा नहीं था। एक किशोर वय वर्ग का अक्खड़ पन, कहना न मानना, बात न सुन्ना जैसी बुराइयां थीं पर मैंने उनसे दोस्ताना व्यवहार करके काम करना शुरू किया।

👉🏻 लेकिन यहाँ के बच्चों के लिए विचार सुनना ही कठिन था तो बोलना तो बहुत दूर की बात थी विद्यालय का भौतिक परिवेश भी अच्छा नहीं था।

👉🏻 विद्यालय में न तो चारदीवारी थीं,  न तो गेट था। फर्श टूटा हुआ था।  हमने बच्चों के साथ मिल कर फर्श को बैठने लायक बनाया।

👉🏻 क्योंकि यही मेरी कर्मभूमि भी है।

👉🏻 प्रार्थना स्थल को समतल व व्यवस्थित किया।

👉🏻 राष्ट्रीय पर्वो में विद्यालय की साफ सफाई से विद्यालय की रंगत बदल जाती थी। बच्चों औऱ मेरे प्रयास को देखते हुए खण्ड शिक्षा अधिकारी ने विद्यालय के लिए धन आवंटित कराया, जिससे विद्यालय का सुंदरीकरण किया गया। आज विद्यालय में पेयजल आपूर्ति, शौचालय, पंखे जूते चप्पल की रैक व किचन गार्डन आदि की व्यवस्था है।

👉🏻 बच्चों के लिए शैक्षिक माहौल बनाने के लिए उन्हें अपना गुल्लक बनाने के लिए तैयार किया क्योंकि उनके पास न कापी, न पेन, न पेन्सिल, न रबर कुछ रहता ही नहीं था। माता- पिता से पैसे मांगने पर मार व डॉट पङती थीं। मैंने उन्हें  बताया कि गुल्लक से वह अपनी इन जरूरत को पूरा कर लेंगे।

👉🏻 विज्ञान शिक्षिका होने के कारण बच्चों को मैंने प्रयोग कर के कुछ कविता के रूप में व नाटक के रूप में पाठ को पढ़ाना शुरू किया, जिससे विद्यालय का वातावरण कुछ खुश नुमा बनना शुरू हुआ।

👉🏻 कुछ चित्र रद्दी कागज से विज्ञान के मॉडल बनाने शुरू किये। बच्चे अब पढ़ाई में रुचि लेने लगे थे। जो पहले सुनते ही नहीं थे। अब वह बात भी मानने लगे थे।

👉🏻 प्रत्येक शनिवार को पढ़ाये गये पाठ का प्रस्तुतिकरण बच्चों द्वारा किया जाने लगा। भाग लेने वाले बच्चों को ईनाम भी दिया जाता है।

👉🏻 विद्यालय में विज्ञान प्रदर्शनी लगवाई। गाँव वाले अपने बच्चों के मॉडल चित्र व प्रस्तुतिकरण देख कर गदगद हो रहे थे। हमारे विद्यालय के बच्चे राज्य स्तरीय प्रतियोगिता लखनऊ तक गये।

👉🏻 मैंने विद्यालय में एक दीवार पत्रिका का  निर्माण कराया। बच्चों में से ही किसी को सम्पादक, चित्रकार व संकलनकर्ता आदि के पद दिये औऱ कार्यशाला 1 घन्टे चलाने के लिए समय दिया दीवार पत्रिका का शुभारंभ शिक्षक दिवस को श्री प्रवीण त्रिवेदी जी प्राइमरी का मास्टर डॉट कॉम जी द्वारा कराया।

👉🏻 जयन्ती व त्योहारों के अवसर में उनके सांस्कृतिक महत्व की जानकारी व कार्यक्रम का आयोजन किया जाने लगा।

👉🏻 बेटी पढ़ाओ बेटी बचाओ अभियान के लिए गीत प्रहसन आदि कर जागरूकता फैलाने का कार्य किया।

👉🏻 यातायात नियमों के लिए नुक्कड नाटकों का प्रयोग किया।    

🔊  *सुनो सुनो सब ध्यान से तुम हमारी बात।                                    गाड़ी चलाते समय न करो मोबाइल से बात।                          सुनो सुनो सब ध्यान से तुम हमारी बात                                     हेलमेट  फ़ैशन बन जाये औऱ रहे हमेशा साथ।*

👉🏻 हर बच्चा अपने जन्मदिन पर एक पौधा लगता हैं।

👉🏻 अपना जन्मदिन कार्ड स्वयं बनाता है।  और उसमें अच्छी आदत व एक बुरी आदत लिख कर लेने व छोड़ने का वादा करता है।

👉🏻 विद्यालय में मीना मंत्री मण्डल सक्रिय है।

 👉🏻 मेरा विद्यालय आदर्श विद्यालय के लिए चयनित किया गया है।

_✏संकलन_

*📝टीम मिशन शिक्षण संवाद।*

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