गुड्डा संग ब्याह कराऊँगी

माँ मुझको भी गुल्लक ला दो,
मैं पैसौं को जोड़ूँगी।
गुड़िया मेरी बड़ी हो गई,
गुड्डा संग ब्याह कराऊँगी।

छोटा सा समियाना होगा,
मंडप भी सजवाऊँगी।
ढोलक और नगाड़ों के संग,
शहनाई बजवाऊँगी।

अच्छा तो सोचा है, लाड़ो
पर गुड्डा तू न, ला पाएगी।
लालच की इस दुनिया में तू,
दहेज कहाँ से लाएगी।

गुड्डा गाड़ी माँगेगा तो,
तेरी गुल्लक होगी छोटी।
गुड़िया को तू पढ़ा अभी तो,
उसकी अभी है उमर भी छोटी।

रचयिता
डॉ0 ललित कुमार,
प्रधानाध्यापक,
प्राथमिक विद्यालय खिजरपुर जोशीया, 
विकास खण्ड-लोधा, 
जनपद-अलीगढ़।

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