चिड़िया रानी


सुनो ओ प्यारी चिड़िया रानी,
खाओ दाने पी लो पानी ।
छत पर मेरी आ जाओ तुम,
छाँव में थोड़ा सुस्ताओ तुम ।
जलती धरा तेरे पंख हैं जलते,
थक गयी होगी उड़ते उड़ते,
नीड़ में बच्चे आकुल होंगे,
भूख प्यास से व्याकुल होंगे,
कुछ खा लो कुछ लेकर जाओ,
कुछ दाने उनको भी खिलाओ,
ची ची करके चहकेंगे जब,
ख़ुशी के मारे उछलेंगे सब।
उनको सुनाना नयी कहानी ।
सुनो ओ प्यारी चिड़िया रानी।
इंसानो ने घर तेरा छीना,
कर दिया तेरा मुश्किल जीना
बेघर किया जब पेड़ काटकर,
बिखरे थे सब तिनके उड़कर,
किस्मत को यूँ ढलते देखकर,
रोयी होगी तू अश्रु बहाकर।
भागी होगी इधर उधर,
अपने सारे रिश्ते समेटकर।
इंसान हूँ मैं कहूँ किस जुबानी
सुनो ओ प्यारी चिड़िया रानी।।
उड़ उड़ आती थी तू आँगन में,
पीछे भागते थे बचपन में,
पेड़ पुराना जब टूट गया,
फिर साथ ओ प्यारा छूट गया ।
कहाँ गयी फिर आ जाओ ,
पीकर पानी दाने खाओ ।
बुला रहे बिखरे दाने,
आओ मीठे गीत सुनाने
जीवित कर दो यादें पुरानी
सुनो ओ प्यारी चिड़िया रानी।।

रचयिता
गीता गुप्ता "मन"
प्राथमिक विद्यालय मढ़िया फकीरन,
विकास क्षेत्र - बावन,
जनपद - हरदोई।

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