७०६~ अनमोल रत्न कैलाश मौर्य (स०अ०) कम्पोजिट विद्यालय मक्खापुर, ब्लॉक- फूलपुर, आजमगढ़, उत्तर प्रदेश

 🏅#अनमोल_रत्न शिक्षक-2025🏅

मित्रो आज हम आपका परिचय मिशन शिक्षण संवाद के माध्यम से एक ऐसे अनमोल_रत्न शिक्षक साथी का परिचय करवा रहे हैं जिन्होंने अपने समर्पित, प्रेरक एवं अनुकरणीय प्रयासों से मिशन शिक्षण संवाद के 4P मॉडल के प्रथम भाग परिवेश परिवर्तन को वास्तविक रूप में अपने विद्यालय में प्रमाणित कर दिखाया है कि परिवेश परिवर्तन से हृदय परिवर्तन तक की यात्रा को सफलता से पूरा किया जा सकता है। आज जहाँ कुछ लोग शिक्षकों को निष्क्रिय एवं नकारात्मक साबित करने की हर कोशिश करने पर तुले हैं वहीं हमारे हजारों शिक्षक साथी बंजर और वाउण्ड्रीवाल रहित विद्यालयों में भी फूल खिलाकर सक्रिय, सकारात्मक और विद्यालय को सामाजिक विश्वास का केन्द्र बनाकर साफ और स्पष्ट संदेश दे रहे हैं कि हमने ही बदला था, हम ही बदल रहे हैं, हम ही बदलकर रहेंगे।
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आइये देखते हैं आपके परिचय के साथ आपके द्वारा किए गये प्रेरक प्रयासों को-
👉1- शिक्षक- कैलाश मौर्य (स०अ०)
👉2- विद्यालय- कम्पोजिट विद्यालय मक्खापुर, ब्लॉक- फूलपुर, आजमगढ़, उत्तर प्रदेश

👉3- शिक्षक के रूप में सेवा की शुरुआत का वर्ष  2015
👉4- शिक्षक के रूप में आप द्वारा विद्यालय, बच्चों और समाज के बीच किए गये स्वैच्छिक स्वयंसेवी के रूप में प्रेरक, अनुकरणीय एवं सकारात्मक कार्यों का संक्षिप्त विवरण।




मेरी पहली नियुक्ति 09-11-2015  को आजमगढ़ जनपद के अहरौला ब्लाक के कम्पोजिट विद्यालय बिड़हर (तत्कालीन प्रा०वि०बिड़हर) में सहायक अध्यापक के रूप मे हुई। किसान परिवार में पैदा होने के कारण बचपन से ही पेड़-पौधो व जीव जन्तुओं से काफी लगाव रहा। विद्यालय में नियुक्ति के बाद बच्चों को किताबी ज्ञान के साथ ही साथ पर्यावरणीय व व्यवहारिक ज्ञान देने में हमारी बहुत रुची थी। 154 नामांकन के सापेक्ष सिर्फ 30-35 बच्चों का विद्यालय आना मुझे अच्छा नहीं लगता था। इसलिये मैने बच्चों को परिवेश से जोड़कर कहानियों व गतिविधियों के माध्यम से पढ़ाना शुरु किया। जिससे बच्चों की उपस्थिति में निरन्तर सुधार होता गया।बच्चों के साथ मिलकर जब हमने विद्यालय परिवेश को सुन्दर व आकर्षक बनाने का प्रयास किया तो न सिर्फ हमें बच्चों का साथ मिला, बल्कि अभिभावक भी हमारी मुहिम का हिस्सा बनने लगे। अब विद्यालय प्रांगण साफ सुथरा व आकर्षक लगने लगा, तो बच्चों की उपस्थिति अपने आप सुधरने लगी। पर्यावरणीय गतिविधियों को अपने शिक्षण का हिस्सा बनाने के कारण बच्चों व अभिभावकों से मेरा आत्मीय संबन्ध बहुत ही गहरा हो गया। इतना गहरा आत्मीय संबन्ध हो गया कि जब 12 जनवरी 2024 को मेरा म्युचुवल ट्रांसफर हुआ तो पूरा गांव रोने लगा व पूरे ब्लाक के अध्यापक बन्धु दु:खी हुए।







ट्रांसफर के बाद जब 12 जनवरी 2024 को हम कम्पोजिट विद्यालय मक्खापुर पहुंचे तो वहाँ की दशा देखकर मन में बहुत दु:ख हुआ, क्योंकि पिछले विद्यालय को स्वर्ग जैसा (PMश्री) बनाकर आये थे। इस विद्यालय में चार पेड़ के अलावा सिर्फ एक तुलसी जी का पौधा था। जिसकी रख रखाव के अभाव में बहुत ही दयनीय स्थीति थी। इस विद्यालय को मैने चुनौती के रूप  में लिया। प्रकृति_मित्र बनकर वृक्षारोपण कार्यक्रम के तहत 110 पेड़ पौधों का रोपण किया गया। विद्यालय में चहारदीवारी न होने के कारण पेड़ों की सुरक्षा भी एक चुनौती थी। तब हमने अपनी सूझबूझ से कझूर की पत्तियों से ट्री गार्ड बन्जर पेड़ों की सुरक्षा सुनिश्चत की। बहुत ही संघर्ष के बाद साल भर बाद आज भी लगभग 50 पेड़ों को जिन्दा रखने में हम सफल हुए। जिसका प्रिन्ट मीडिया ने भी जिक्र अपने समाचार पत्र में किया है। पर्यावरण के प्रति हमारी संवेदना ने बच्चों के अन्दर भी भरने को मजबूर कर दिया। संयोगवश राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 में बच्चों को पर्यावरण के प्रति जागरूक बनाने व पर्यावरण का सजग प्रहरी बनाने की दिशा में सराहनीय प्रयास करते हुए हर स्कूल में "इको क्लब फार मिशन लाइफ के गठन को अनिवार्य बनाकर बच्चों को पर्यावरणीय शिक्षा देने के लिये एक मील का पत्थर साबित हुआ।
अपने विद्यालय में इको क्लब फार मिशन लाइफ का गठन करके हमने भी अपने बच्चो में पर्यावरण के प्रति संवेदनशीलता व जागरूकता बढ़ाने का सा्र्थक प्रयास किया। आज हम लगभग डेढ़साल बाद बच्चों के साथ-साथ अभिभावक बन्धुओं को भी पर्यावरण के प्रति सजग व संवेदनशील बनाने में सफल हुए। जिसका असर गाँव की गलियों व लोगो के घर आंगन तक देखने को मिल रहा है।
👉5- वर्तमान विद्यालय में आपके द्वारा किए जा रहे प्रेरक प्रयास।
बच्चों को सुबह की सभा में प्रतिदिन प्रार्थना के बाद अभियान गीत, राष्ट्रीय प्रतिज्ञा, पी०टी० जनरल नालेज के 10 नये नये प्रश्न। गतिविधि आधारित शिक्षण।















👉A- विद्यालय में नामांकन-
पिछले स्कूल में आठ साल तक पढ़ाने के दौरान 95 की संख्या से 370 तक ले गये, जिससे विद्यालय पी०एम०श्री तक पहुँचा तथा 12 जनवरी 2024 को स्थानानान्तरण के बाद कम्पोजिट विद्यालय मक्खापुर फूलपुर आजमगढ़ में 155 नामांकन के सापेक्ष 40-50 बच्चों का आना। मेरे प्रयास से 155 में अब रोजाना 130-135 बच्चे आते है।
👉B- विद्यालय में उपस्थिति का प्रतिशत- 90-95%
👉C- विद्यालय में 100% उपस्थित रहने वाले विद्यार्थियों की औसत संख्या-
25
👉D- विद्यालय के बच्चों की विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता।
वर्ष, परीक्षा का नाम, उत्तीर्ण विद्यार्थियों की संख्या-
NMMSE 2024  1 विद्यार्थी

👉7- संकलन- कैलाश मौर्य (स०अ०)
कम्पोजिट विद्यालय मक्खापुर, ब्लॉक- फूलपुर, आजमगढ़, उत्तर प्रदेश

नोट- यदि आप भी एक सरकारी विद्यालय के शिक्षक हैं और आपने भी कुछ प्रेरक और अनुकरणीय कार्य अपने विद्यालय में किए है जिससे सरकारी शिक्षा और शिक्षक का समाज के बीच विश्वास बढ़ा है तो हमें अपना विवरण और विवरण को प्रमाणित करती हुई फोटो के लिए मिशन शिक्षण संवाद के वाट्सअप नम्बर- 9458278429 पर जरूर भेजें। क्योंकि जिस तरह से लगातार सरकारी शिक्षा और शिक्षक के नाम पर भ्रम और भ्रान्तियों के साथ उसके सामाजिक विश्वास को कमजोर करने के लिए नकारात्मकता फैलाई जा रही हैं, उसका उत्तर अब सरकारी शिक्षा और शिक्षक के अस्तित्व बचाने के लिए, सकारात्मकता की लाइन इतनी अधिक लम्बी करनी है, जिससे नकारात्मकता फैलाने वाले स्वयं एक दिन सकारात्मक होकर सरकारी शिक्षा और शिक्षक के प्रयासों को मानने एवं स्वीकारने को मजबूर हो जायें।
हमने ही बदला था। हम ही बदल रहे हैं। हम ही बदलकर रहेंगे।
धन्यवाद!🙏🙏🙏
विमल कुमार
टीम मिशन शिक्षण संवाद
03-08-2025

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