125/2025, बाल कहानी- 12 अगस्त
बाल कहानी - वर्षाकाल की सावधानियाँ
------------------------
विजय अपने गाँव के सरकारी विद्यालय के कक्षा तीन का विद्यार्थी था। वह पढ़ने में ठीक था, परन्तु शैतान बहुत था। उसके पिता और माताजी बटाई पर खेत पर फसल उगाते थे। वह पेड़ों पर चढ़ता, उनसे फल तोड़ता था। उसके मम्मी-पापा ने उसे समझाया था कि, "बरसात के दिनों में लगातार पानी बरसने के कारण पेड़ो में फिसलन हो जाती है, अतः वह पेड़ पर न चढ़े।"
एक दिन वह घर जाकर बगल के अमरूद के पेड़ पर चढ़ गया। कुछ अमरूद उसने तोड़े और नीचे खड़ी अपनी बहन को दे दिये। एक अमरूद थोड़ा ऊपर था, उसे भी वह तोड़ना चाह रहा थाह उसकी बहन ने कहा कि, "उस अमरूद के चक्कर में न पड़े, काफी हो गए खाने को।" पर विजय नहीं माना। उसने जैसे ही ऊपर हाथ उठा के डाली पकड़नी चाही, उसका पैर गीली डाली से फिसल गया। वह जमीन पर गिर गया और बेहोश हो गया। उसे जब कुछ घन्टे तक भी होश नहीं आया तो उसके माता-पिता उसे अस्पताल ले गये। डॉक्टरों ने टेस्ट कर बताया कि, "उसके दिमाग में खून का थक्का जमने के कारण वह कोमा में चला गया है।" फिर एक डॉक्टर, जो बहुत ही भले इंसान थे, उन्होंने उसका ऑपरेशन किया। ऑपरेशन के करीब दो दिन बाद उसने आँखें तो खोली परन्तु वह न बोल सकता था, न खा सकता था, न ही चल सकता था। उसको नाक से नली द्वारा तरल पेय देना था। गले में काट के साँस का पाइप लगा था।उसके माता-पिता बहुत गरीब थे । सबने जितना हो सके, उनकी मदद की। तब कहीं जाके करीब एक महीने बाद वह थोड़ा बैठने लगा।करीब वतीन महीने बाद उसने थोड़ा-थोड़ा चलना शुरू किया। बड़ी मुश्किल से वह सामान्य अवस्था में आ पाया। पर अब वह कभी भी इस घटना को नहीं भूलता था।
#संस्कार_सन्देश -
हमें कभी ऐसा काम नहीं करना चाहिए, जिससे हमारा जीवन ही संकट में आ जाये। हमें दूसरों की सलाह पर विचार करना चाहिए।
कहानीकार-
#भावना_पाण्डे (स०अ०)
राजकीय प्राथमिक विद्यालय कठघरिया, विकासखण्ड- हल्द्वानी जनपद- नैनीताल (उत्तराखण्ड)
✏️संकलन
📝टीम #मिशन_शिक्षण_संवाद
#दैनिक_नैतिक_प्रभात
Comments
Post a Comment