127/2025, बाल कहानी- 14 अगस्त
बाल कहानी - मुनिया और उसका भाई
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बहुत पहले की बात है, सहारनपुर गाँव एक नदी के किनारे बसा था | वहाँ करीब पचास परिवार रहते थे | गाँव बहुत साफ-सुथरा और बहुत ही सुन्दर था। वह पहाड़ों से घिरा था। सब खुशी से रहते थे और खेती-बाड़ी का काम करते थे।
एक दिन की बात है, उसके गाँव से पचास किलोमीटर दूर एक छोटा सा शहर था। राखी के एक दिन पहले वहाँ एक भब्य मेला का आयोजन हुआ था। गाँव के सभी लोग मेला देखने गये थे और रक्षा-बन्धन के लिए समान भी खरीदने गये थे। सबने मेला देखा और जैसे ही घर वापस आने के लिए गिनती करने लगे तो पता चला कि मुनिया का भाई लापता है। सबने मेला में चारों तरफ ढूँढा, पर मुनिया के भाई का पता नहीं चला। घर भी आना था, इस कारण बहुत लोग वहाँ से अपने घर वापस आ गये। मुनिया और उसके माँ-बाप वहीं पर रुक गये थे। उन्होंने फिर से मेले में घूम-घूम कर उसे खोजा। रात हो गई थी। मुनिया बहुत रो रही थी और सोच रही थी कि, "कल राखी का त्यौहार है वह अब किसको राखी बाँधेगी?" उसकी माँ ने मुनिया को समझाया कि, "चिन्ता मत करो, हम सुबह घर जायेंगे और रात भर तुम्हारे भाई को ढूँढेंगे।" इस तरह उन्होंने रात में भी ढूँढा पर वह नहीं मिला। लोग जब थक गए तो वहीं पर सो गये। जब सुबह हुई तो मुनिया ईश्वर से प्रार्थना करने लगी कि, "उसका भाई मिल जाए।" और अकेले ढूँढने के लिए फिर से निकल पड़ी। मुनिया का भाई भीड़ में खो गया था। उसने अपने माता-पिता और गाँव के लोगों को बहुत ढूँढा, पर कोई नहीं मिला इसलिए एक होटल वाले के पास बैठा था। होटल वाले ने पुछा तो उसने सब कुछ बताया। फिर होटल वाले ने कहा कि, "चिन्ता मत करो! तुम्हारे माता-पिता, बहन ढूँढते हुए यहाँ जरूर आयेंगे। तुम चाहो तो यहाँ काम कर सकते हो, तुम्हें पैसे भी मिलेंगे।" उसने 'हाँ' कहा और होटल में काम कर रहा था।
सुबह मुनिया जब वहाँ पहुँची तो अपने भाई को चिल्लाने लगी। उसके भाई ने आवाज सुनी तो तुरन्त दौड़कर आया। मुनिया बहुत रो रही थी और अपने भाई से पूछा कि, "आपने हम लोगों को बताया क्यों नहीं? हम सब कल शाम से आपको ढूँढ रहे हैं। माँ और पिताजी जी रात भर ढूँढ रहे थे।" उसके भाई ने कहा कि, "कल राखी का त्यौहार है इसलिए मैं होटल में काम कर रहा था। तुम्हारे लिए एक बहुत सुन्दर फ्राॅक लेना है मुनिया।" मुनिया बोली, "मुझे कुछ नहीं चाहिए भाई! मुझे सिर्फ मेरा भाई चाहिए।" दोनों भाई बहन के आँखों में आँसू भर आये। फिर दोनों अपने माता-पिता जी के पास आये और फिर घर वापस आये।
स्नान ध्यान करके मुनिया ने अपने भाई को राखी बाँधी, तिलक लगाया और आरती की, फिर मिठाई खिलायी। दोनों बहुत खुश थे। उसके माता-पिता भी बहुत खुश थे। आखिर क्यों नहीं मुनिया को उसका भाई मिल गया था?
संस्कार सन्देश-
सच्चे मन से ईश्वर की प्रार्थना करने से भगवान हमारी सहायता जरूर करते हैं और हमें बार-बार प्रयास भी करना चाहिए। प्रयास करने पर ही मुनिया को उसका भाई मिला।
कहानीकार-
#प्रेमलाल_किशन (स०अ०)
शासकीय प्राथमिक शाला- बुढ़नपुर
संकुल केन्द्र- गहरीनमुड़ा,
विकासखण्ड व जिला- सक्ती, छत्तीसगढ़
✏️संकलन
📝टीम #मिशन_शिक्षण_संवाद
#दैनिक_नैतिक_प्रभात
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