129/2025, बाल कहानी- 19 अगस्त

बाल कहानी - देश प्रेम
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राम सिंह एक छोटे से गाँव में रहकर खेती-बाड़ी करता था। उसके मन में देश-प्रेम कूट-कूट कर भरा था। उसके दो पुत्र थे- मोहन और सोहन। वह चाहता था कि उसके पुत्र सेना में भर्ती हों और देश की सेवा करें लेकिन दोनों का मन पढ़ाई में नहीं लगता था। इस कारण से रामू का यह सपना अधूरा रह गया। मोहन के एक बेटी रानी और बेटा राजू और सोहन के एक बेटी नीता थी।
तीनों बच्चे गाँव के प्राथमिक विद्यालय में पढ़ाई करते थे। तीनों बच्चे जब स्कूल से लौटकर आते, तो अपने दादा और दादी को विद्यालय की सारी बातें बतातें थे। दादा जी शाम के समय उन्हें देश-भक्ति की कहानी सुनाया करते थे।
बच्चे अपने दादाजी को बताते हैं कि, "कल हमारे विद्यालय में पन्द्रह अगस्त का पर्व मनाया जाएगा।" बच्चे दादा जी से पूछते हैं कि, "यह पर्व क्यों मनाया जाता है?
दादा जी ने बच्चों की जिज्ञासा शान्त करते हुए स्वतन्त्रता-दिवस के बारे में विस्तार से बताया कि, "अनेकों वीरों ने अपने प्राणों की आहुति दी, तब जाकर आजादी का यह प्यारा दिन आया है।" दादाजी कहते हैं कि, "रात ज्यादा हो गई। बच्चों! अब सो जाओ, सुबह स्कूल भी जाना है।"
अगले दिन सुबह सब बच्चे हाथों में तिरंगा लेकर स्कूल के लिए जाते है।
विद्यालय में धूमधाम से राष्ट्रीय पर्व मनाया जा रहा था। बच्चे स्टेज पर अपनी अपनी प्रस्तुत दे रहे थे, तभी कहीं से बन्दर आता है। वह बच्चों पर झपटता है। सभी बच्चे डरकर भागने लगते हैं, इसी बीच उनके हाथों से तिरंगे गिर जाते हैं।
राजू और रानी और नीता वहाँ जाकर झण्डा जो गिर गये थे, उसे हाथों में उठाने लगते हैं। अध्यापक बन्दरों को वहाँ से भगाते हैं। वे सभी बच्चों को शान्त रहने के लिए कहते हैं। कार्यक्रम में शिरकत होने आये। अभिभावक और अतिथि राजू रानी और नीता की देश प्रेम को देखकर प्रसन्न हो जाते हैं।
उन बच्चों को सभी के सामने पुरस्कृत करते हैं और उनके देश प्रेम की प्रशंसा करते हैं। वे सभी अभिभावको से कहते हैं कि, "हमें बचपन से ही बच्चों में देश-प्रेम जगाना चाहिए।" वे सभी बच्चों को उनसे प्रेरणा लेने के लिए कहते हैं।
बच्चे स्कूल से जाकर सारी घटना अपने दादाजी को बताते हैं। दादा जी की आँखों में खुशी के आँसू आ जाते हैं। वे बच्चों को प्यार से गले लगा लेते हैं।

#संस्कार_सन्देश - 
हम सभी को देश-प्रेम को सबसे ऊपर रखना चाहिए। अपने बच्चों में देश-प्रेम जागना चाहिए तथा अपने राष्ट्रीय-ध्वज का सम्मान करना चाहिए।

कहानीकार-
#मृदुला_वर्मा (स०अ०)
प्रा० वि० अमरौधा प्रथम
अमरौधा (कानपुर देहात)

✏️संकलन
📝टीम #मिशन_शिक्षण_संवाद 
#दैनिक_नैतिक_प्रभात

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