138/2025, बाल कहानी- 29 अगस्त
बाल कहानी - लाचार माँ
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पूजा की शादी अच्छे परिवार में हुई और सास-ससुर, ननद का प्यार उसको भरपूर मिला। पति वकील था। एक बेटा, दो बेटी हुए। बड़े होने पर वे अपनी पढ़ाई करने लगे। तीनों ही बच्चे बहुत होशियार थे। पूजा गाँव के प्राइमरी विद्यालय में शिक्षामित्र के पद पर थी। वे सब खुशहाल जीवन जी रहे थे।
एक दिन अचानक पूजा के पति की मृत्यु हो गई। पूजा पूरी तरह टूट चुकी थी। इस हादसे के बाद पूजा के ससुर भी गुजर गए। अब सासू माँ और तीन बच्चे लेकिन पूजा ने हिम्मत नहीं हारी। पूजा के बच्चों ने अपनी आगे की पढ़ाई जारी रखी। कुछ सालों के बाद पूजा की सहायक अध्यापक के पद पर नियुक्त हो गई। घर में खुशी का माहौल हो गया। बेटे और बेटी ने पोस्ट ग्रेजुएट की डिग्री ली और छोटी बेटी इण्टर में आ गई। अचानक तूफान दोबारा से आया और उसे सहायक अध्यापक से शिक्षामित्र बना दिया गया, जिससे पूजा की तबीयत खराब हो गई और अब वह दोबारा से संघर्ष का जीवन जी रही थी, लेकिन बड़े दोनों बच्चों ने अपने पैरों पर खड़ा होने की सोची और कहा कि, "माँ! आप अपने स्कूल में बच्चों पर ध्यान दो। हमारी चिन्ता न करें। बच्चों ने कड़ी मेहनत की। ट्यूशन इत्यादि से अपना खर्चा चलाया। पूजा बहुत खुश थी कि उसके तीनों बच्चे आगे बढ़ रहे हैं। छोटी बेटी ने भी डी.एल.एड. में प्रवेश ले लिया। बड़ी बेटी इंजीनियर बन गई और बेटा अकाउंटेंट का कार्य करने लगा। बेटा बड़ा था, उसकी शादी वाले आये। एक लड़की पसन्द आई और शादी कर दी गई। लेकिन शादी के कुछ महीनों बाद ही बेटा बीमार पड़ गया। काफी इलाज करवाने के बाद भी वह सही नहीं हुआ और एक अभागन माँ का जो इकलौता बेटा था, वह इस दुनिया से अचानक चला गया, पूजा की तो जैसे दुनिया ही उजड़ गई। उसके बुढ़ापे का सहारा दूर हो गया।
जब विद्यालय को मर्ज होता देखा तो उसके होश उड़ गए। इधर बेटे का गम, शोक में डूबी हुई और उधर दूसरे विद्यालय में जाने के गम ने उसको झकझोर कर रख दिया। पूजा की दोनों बेटियाँ बहुत काबिल थीं। उन्होंने कहा, "भाई नहीं है तो हम भाई बनकर अपना जीवन-यापन करेंगे।"
पूजा को अपने बच्चों की बात बहुत अच्छी लगी और वह अगले दिन विद्यालय गयी। जो सैंतीस बच्चे थे, उनको विद्यालय बुलाया। बच्चे खुशी-खुशी दौड़कर आ गये। संघर्ष तो जीवन में आता ही रहेगा लेकिन यह सबसे बड़ा संघर्ष है कि मेरा एक लाल गया, उसका शक मनाऊँ कि इन विद्यालय में जो बच्चे पढ़ रहे हैं और यह इधर-उधर भटकेंगे तो उनके भविष्य का क्या होगा? बस! यह बात मन में ठान कर माता-पिताओं से बात की मीटिंग की। छात्र संख्या को बढ़ाने की कोशिश की और इतनी सारी मेहनत के बाद विद्यालय मर्ज होने से बच गया। अब पूजा धीरे-धीरे सामान्य जीवन जीने लगी।
#संस्कार_सन्देश -
हमें कठिन परिस्थतियों में हिम्मत के संघर्ष करना चाहिए। इसी से जीवन निखरता है।
कहानीकार-
#पुष्पा_शर्मा (शि०मि०)
पी० एस० राजीपुर
अकराबाद, अलीगढ़ (उ०प्र०)
✏️संकलन
📝टीम #मिशन_शिक्षण_संवाद
#दैनिक_नैतिक_प्रभात
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