124/2025, बाल कहानी- 11 अगस्त


बाल कहानी - स्वभाव
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एक घने जंगल में बहुत सारे जंगली जानवर रहते थे। वहाँ पर एक बहुत पुराना पीपल का पेड़ था, जिस पर ढेर सारे पक्षी अपना घोंसला बनाकर रहते थे। पेड़ बहुत पुराना था इसलिए उसकी छाया बहुत घनी थी अधिकतर जंगली जानवर उसके नीचे जाकर आराम करते थे।
इस पेड़ के ऊपर एक कबूतर का परिवार रहता था। उनमें से एक कबूतर का रंग एकदम बिल्कुल सफेद था, जिसे अपनी सुन्दरता बहुत घमण्ड था। सफेद कबूतर अक्सर मनमानी करता था। वह बताए बिना कहीं भी चला जाता था। उसके परिवार के बड़े उसे समझाते कि, "हमेशा मनमानी अच्छी नहीं होती है।"
पर वह उनकी एक नहीं सुनता था।
पेड़ के नीचे शाम के समय अक्सर एक लोमड़ी आया करती थी। उसकी नजर सफेद कबूतर पर थी। वह अक्सर इस सफेद कबूतर से उसकी सुन्दरता की बढ़ाई किया करती थी। सफेद कबूतर भी अपनी बढ़ाई सुनकर फूला न समाता था और उसे अपना मित्र समझने लगा।
परिवार वालों उसे ऐसा करने के लिए मना किया। उन्होंने समझाया कि, "जीवों की प्रकृति के अनुसार ही उनसे दोस्ती और ताल-मेल बढ़ाना चाहिए। सफेद कबूतर उनकी बात को अनसुना कर देता। 
एक दिन की बात है, सभी पक्षी भोजन की तलाश में बाहर गये थे।
लोमड़ी ने मौका पाकर सफेद कबूतर को अपनी बातों में उलझाया और और उसे नीचे आकर बात करने के लिए कहा। सफेद कबूतर तुरन्त उसकी बातों में आ गया। धीरे-धीरे वह उनके नजदीक पहुँच गयी। कबूतर अपनी सुन्दरता के घमण्ड में यह सब भूल गया कि लोमड़ी उसके पास आ गयी है। मौका पाकर लोमड़ी ने उसके ऊपर झपट्टा मार दिया और देर किए बिना उसने उसे मुँह में पकड़ लिया।
अब कबूतर पंख पड़फड़ाने लगा। छूटने की उसने बहुत कोशिश की लेकिन वह नाकाम रहा। अब वह पछताने लगा कि शायद मैंने बड़ों की बात मान ली होती तो यह नौबत ना आती। लेकिन अब पछताए होत का जब चिड़िया चुग गई खेत। लोमड़ी जल्दी उसे चबाकर खा गई।

#संस्कार_सन्देश - 
हमें अपने बड़ों की बात माननी चाहिए और हिंसक स्वभाव के जीवों से दूरी बनाए रखना चाहिए। जीवों के स्वभाव के अनुसार उनसे मेल-जोल रखना चाहिए।

कहानीकार-
#मृदुला_वर्मा (स०अ०)
प्रा० वि० अमरौधा प्रथम
अमरौधा (कानपुर देहात)

✏️संकलन
📝टीम #मिशन_शिक्षण_संवाद 
#दैनिक_नैतिक_प्रभात

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