पिता

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सारे  रिश्ते  उनके  दम  से
सारे  नाते  उनसे  हैं
सारे  घर के  'दिल' की धड़कन
सारे  घर की जान  'पिता'!

घर की  इक-इक  ईंट में शामिल
उनका  खून-पसीना  है
सारे  घर  की  रौनक  उनसे
सारे  घर  की  'शान'  पिता!

मेरी इज्जत, मेरी  शौहरत
मेरा  रुतबा  मान  पिता
मुझको हिम्मत देने वाले
मेरा हैं 'अभिमान'  पिता

शायद  'रब' ने देकर भेजा
फल  यह अच्छे  कर्मों का
उसकी रहमत, उसकी नेमत
उसका है  'वरदान'  पिता

मेरा साहस,  मेरी इज्जत
मेरा है  'सम्मान'  पिता
मेरी ताकत,  मेरी पूंजी
मेरी है "पहचान" पिता !!

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पिता कब होते हैं, खुद के अपने
माँ संवेदना है,  पिता  'कथा'
माँ  'जमीं'  है,   पिता  'आसमां'
पिता  के  कंधों  पर,
बच्चों का 'बचपन' होता है
उन्हीं  की  मेहनत  से
हमारे  सितारे  जगमगाते हैं
क्योंकि  वही  हमें
धूल से 'नगीना' बनाते हैं
पिता  धन्य  हैं
परम  पूज्यनीय  हैं
जिनके  आगे  हम  केवल
"शून्य"  हैं !!

रचयिता
श्रीमती ममता जयंत,
सहायक अध्यापक,
प्राथमिक विद्यालय चौड़ा सहादतपुर, 
विकास खण्ड-बिसरख, 
जनपद-गौतमबुद्धनगर।

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