आदर्श गुरु का महान कर्तव्य

शिक्षा के सत्य पथ से,
कभी ना हों आप विचलित।
आदर्श बन जायें आप,
सभी का हिय हो पुलकित।।

     दिया करें बच्चों पर सदा,
     गुरुजी,ऐसा लगन व ध्यान।
     ऊँचे शिखरों को स्पर्श करें,
      ऐसा हो प्रकाशमय ज्ञान।।

अपना प्यारा ध्वज लहराये,
सम्पूर्ण विश्व में प्यारा भारत।
विकसित देश बने भविष्य में,
अर्जित करें आप ऐसी महारथ।।

       नहीं चलेगा भाग्य भरोसा,
       बैठे निज हाथ पर धरे हाथ।
       अपनी मान मर्यादा ना भूलें,
       चलें लेकर सर्वजन को साथ।

पूर्ण करें भारत माँ के,
बिखरे हुए स्वर्णिम सपने।
न जाति,धर्म,वर्ग का अन्तर,
सदा रहें सब प्रिय जन अपने।।

      स्वअमृत वाणी को सत्मन से,
     करें आप अविराम अभिव्यक्त।
     ओजमयी बनें सब नन्हें बच्चे,
     संचारित हो उनमें ऐसी शक्ति।

सत्य,प्रेम,निष्ठा,सत्कर्म का,
सभी को प्रभावी पाठ पढ़ायें।
पहले स्वधारित कर सभी गुण,
जन मन में पूरी आस जगायें।।

    बच्चों में सम्प्रेषित हो सदैव,
     सभी प्रकार का ज्ञान-विज्ञान।
     फिर से होगा सोने की चिड़िया,
     मेरा अपना भारत देश महान।

इस प्रकार सब सत्गुणों को,
नित निज अन्तर्मन में लायें।
कर्तव्य निष्ठा का पालन कर,
समाज में प्रेरणा पात्र बन जायें।।

रचयिता
रवीन्द्र शर्मा,
सहायक अध्यापक,
पूर्व माध्यमिक विद्यालय बसवार,
विकास क्षेत्र-परतावल,
जनपद-महराजगंज,उ०प्र०।

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