अन्तर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस
शैशवकाल हो पल्लवित
हर माँ की यही आशा,
परिवेश में होती समृद्ध
हमारी अपनी मातृभाषा।
अन्य भाषाओं का भी
जो बढ़ाती है ज्ञान,
मातृभाषा ही तो है
जिस पर है हमें अभिमान।
मातृभाषा हो विकसित
यह ज्ञान की जननी है,
हो प्रचार- प्रसार इसका
पहल स्वयं से करनी है।
मातृभाषा दिवस मनाकर
लौ इसकी जलानी है,
मिले पहचान मातृभाषा को
यूनेस्को ने यही ठानी है।
रचयिता
मंजू गुसांईं,
सहायक अध्यापक,
राजकीय आवासीय प्राथमिक विद्यालय थराली,
विकास खण्ड-थराली,
जनपद-चमोली,
उत्तराखण्ड।

बहुतख़ूब💕
ReplyDeleteसुन्दर रचना
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