मातृभाषा

मातृभाषा हिंदी

विश्व पटल पर छायी।

कर्णप्रिय, हृदयप्रिय

हिंदी सबके मन को भायी।


मातृभाषा में बसे हैं,

हम सभी के प्राण।

संस्कृति की संरक्षक है,

हम सबकी है जान।


आत्मविश्वास बढ़ाती हिंदी,

मन में उत्साह जगाती है।

भारतीयों का मान है हिंदी,

विश्व में पहचान दिलाती है।


मातृ में समाई सारी सृष्टि,

सर्वोपरि स्थान है।

भाषा में समाई सारी अभिव्यक्ति।

मातृभाषा हिंदी नाम है।


मातृभाषा में बोलकर,

साहस से भर जाते हैं।

जैसे जिसके भाव है,

चेहरे पर दिख जाते हैं।


संस्कृत की बेटी है हिंदी,

विश्व में सम्मान पायी है।

भारत के नमस्ते शब्द ने,

दुनिया में धूम मचायी है।


सबसे प्यारा देश है मेरा,

हिंदी है हमारी शान।

मातृभाषा से है उजियारा।

हिंदी हैं हम, वतन है हिंदुस्तान।


रचयिता

रीना,

सहायक अध्यापक,

प्राथमिक विद्यालय सालेहनगर,

विकास क्षेत्र-जानी,

जनपद-मेरठ।



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