ऋतुराज बसन्त
पीले-पीले फूलों ने,
धरती पर ली अंगड़ाई,
मनभावन, सुन्दर, मनमोहक,
लो बसन्त ऋतु फिर आई|
दूर- दूर तक पीले खेत,
मानो प्रकृति ने किया श्रृंगार,
ऐसी मनमोहक छवि देखकर,
फूटे हृदय से मधुर उद्गार|
पीले-पीले वस्त्र पहनते,
खाते पारंपरिक पकवान,
जिनकी पौषि्टकता से आती,
शरीर में स्फूर्ति और जान|
बसंत पंचमी के शुभ अवसर पर,
माँ सरस्वती को है नमन,
विद्या और ज्ञान की देवी का,
हम करते पूजन अभिनन्दन|
ज्ञान और बुद्धि का खजा़ना,
माँ सरस्वती हमें प्रदान करे,
ऐसी कामना है हम सबकी,
माँ ऐसा वरदान प्रदान करे|
रचयिता
नौरीन सआदत,
सहायक अध्यापक,
पूर्व माध्यमिक विद्यालय रिसौरा,
विकास खण्ड-महुआ,
जनपद-बाँदा।

Comments
Post a Comment