विद्यालय फुलवारी है

 निर्मल जल सा स्वच्छ हृदय

        मुँह में सुन्दर किलकारी है;

जिनकी इक - इक क्रीड़ा की

        विद्यालय  फुलवारी  है।

 इनकी  रुचि  जो  परख  सकें

        अध्यापक   गुणकारी  हैं;

   पुतले  को  स्तम्भ  बना  दें

          उन पर सब  बलिहारी हैं।

  खेलकूद से शिक्षण विधि  तक

          जो  सच्चे  अनुहारी  हैं;

  वो  ही रास्ता  नेक  दिखायें

          वरना  चहारदीवारी  हैं।।


रचयिता

उदयभान त्रिपाठी,

प्रधानाध्यापक,

प्राथमिक विद्यालय चकमवई राधा,

विकास खण्ड-मऊ, 

जनपद-चित्रकूट।



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