विद्यालय तो अब खुले हैं
विद्यालय अब खुले हैं,
हाँ विद्यालय तो अब खुले हैं।
सजाए जो अपने हाथों से,
दीवारों पर सुंदर चित्र।
उसमें खिलखिलाहटों के
रंग अब मिले हैं।
हाँ विद्यालय तो अब खुले हैं।
बेजान दीवारें, खाली कमरे
अब फिर से मुस्कुराने लगे।
प्रांगढ़ के पेड़, फूल, पत्ती,
सब झूमने गाने लगे।
विद्यालय का कोना कोना
करने लगा स्वागत।
हाँ विद्यालय तो अब खुले हैं।
हाँ विद्यालय तो अब खुले हैं।
फिर से बजने लगी घंटी
प्रार्थना के गीत गाये जाने लगे
मासूम नटखट शरारतों से
कक्षा कक्ष खिलखिलाने लगे
दौड़ना, खेलना, पढ़ना,
फिर से हर विद्यालय सजने लगे।
हाँ विद्यालय तो अब खुले हैं
हाँ विद्यालय तो अब खुले हैं।
चहकते रहे यह बच्चे ऐसे ही
फिर ना आए कोई आपदा।
विद्यालय की सारी रौनक है इनसे,
बस ये रौनकें ऐसे ही बरसती रहें।
हाँ स्कूल तो अब खुले हैं
हाँ स्कूल तो अब खुले हैं।
रचयिता
सुधा गोस्वामी,
सहायक शिक्षिका,
प्रथमिक विद्यालय गौरिया खुर्द,
विकास क्षेत्र-गोसाईंगंज,
जनपद-लखनऊ।

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