स्वागत ऋतुराज का
स्वागत करें ऋतुराज का,
मधुमास कुछ ऐसे मनाएँ|
अम्बर धरा के साथ मिल
हम सब बसन्ती हो जाएँ....
पीत चुनरिया ओढ़ धरा भी,
सरसों के संग मुस्काई|
झूम रही है डाली- डाली,
हर कुसुम कली है इतराई|
चलो उसी के साथ में मिलकर
खुशियों के हम सुमन खिलायें..
हम सब बसन्ती हो जायें....
तरुओं के सूने ठूँठों पर,
नव कोपल हैं मुस्काये|
अमवा की डाली भी देखो,
बौरों के संग बौराये|
आज प्रकृति के साथ में मिलकर,
हम भी, तुम भी नाचे गाएँ....
हम सब बसन्ती हो जाएँ....
फागुन की मीठी दस्तक से,
तन-मन है देखो हर्षाये|
अमराई के झुरमुट में,
कोयल मीठा राग सुनाये|
चलो उसी के साथ में मिलकर,
मधुर-मधुर कोई गीत सुनाएँ..
हम सब बसन्ती हो जाएँ....
उल्लास- हास को लिये अंक में,
आता - जाता है मधुमास|
जीवन- दर्शन की दे परिभाषा,
मन में भरता नूतन विश्वास|
आओ हम सब भी मिलजुल कर,
आशा की नवज्योति जगाएँ...
हम सब बसन्ती हो जाएँ....
रचयिता
निशी श्रीवास्तव,
प्रधानाध्यापक,
प्राथमिक विद्यालय रमपुरवा,
विकास खण्ड-बी0के0टी0,
जनपद-लखनऊ।

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