बसंत आयो रे

आयो रे आयो रे

सखी बसंत आयो रे।


मिट्टी की सुगंध लायो रे

चारों और हरियाली छायो रे।


नई-नई कोंपलें फूटी रे

फूलों की खुशबू महकी रे।


डाल-डाल पक्षी चहके रे

वन उपवन सब महके रे।


सर्दी को विदा कर गर्मी लायो रे

भारी कपड़ों से छुटकारा पायो रे।


आलस और नींद भगायो रे

चारों और खुशियाँ लायो रे।


आयो रे आयो रे

सखी बसंत आयो रे।


रचयिता
सुषमा मलिक,
सहायक अध्यापक,

कंपोजिट स्कूल सिखेड़ा,

विकास खण्ड-सिंभावली, 
जनपद-हापुड़।



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