सरस्वती वंदना

तम हर ज्ञान प्रकाश दिखाए करे सदा उपकार, 

हे वीणावादिनी नमन है बारम्बार|

धन्य भाग्य हों जिसे तेरा आशीष मिले, 

अंधकार हो दूर ज्ञान के चक्षु खुलें, 

स्वर साधना करें हमेशा गाएँ जयजयकार|

हे वीणावादिनी नमन है बारम्बार||

धवल वस्त्रा मन में उज्ज्वल भाव भरो, 

ज्ञानदायिनी इस मन का अज्ञान हरो, 

विद्या का वरदान दो मैया, कर दो बेड़ापार|

हे वीणावादिनी नमन है बारम्बार||

श्रद्धा के ये भाव करें मन से अर्पण, 

माँ शारदे हो जाओ हम पर प्रसन्न, 

आ जाओ माँ इस वाणी में, हृदय ये करे पुकार|

 हे वीणावादिनी नमन है बारम्बार||

मन की शुद्धि हो जाए माँ दो बुद्धि, 

कपट मार्ग से बचें सदा दो सदबुद्धि, 

चरण वंदना करें, अर्चना करो इसे स्वीकार|

हे वीणावादिनी नमन है बारम्बार||

             

रचयिता                 
अर्चना आर्या,
सहायक अध्यापक,
प्राथमिक विद्यालय रामपुर-1,
विकास खण्ड-सदर,
जनपद-मुजफ्फरनगर।



Comments

  1. धन्यवाद मिशन शिक्षण संवाद

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