बसंत पंचमी

माघ मास की तिथि पंचमी

बसंत पंचमी कहलाती है

सर्दी जाने वाली है अब

यह संदेशा लाती है

माँ सरस्वती की पूजा- अर्चना

घर- घर में की जाती है

ज्ञान और संगीत की मन्नत

माँ से माँगी जाती है

पीली - पीली छटा सुनहरी

धरती पर बिखराती है

रंग- बिरंगी उड़ीं पतंगें

सबके मन को भाती है

ये काटा और वो काटा

की टेर सुनाई देती है

बच्चों की टोली सुबह से

छतों पर चढ़ जाती है

पीले मीठे चावल की

खुशबू मन को भाती है

हर्षोल्लास से मिलजुलकर

बसंत आगमन की खुशी मनाई जाती है


रचयिता

शालिनी शर्मा,

सहायक अध्यापक,
राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय छापुर,
विकास खण्ड-भगवानपुर,
जनपद-हरिद्वार,
उत्तराखण्ड।



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