ऋतुराज बसंत
पतझड़ का सूनापन मिटाने आया ऋतुराज बसंत
अनगिनत फूलों से सजकर धरती हुई पुनः जीवंत।
ठूंठ वृक्षों का नवपल्लवों से हो रहा नवसृजन
खुशी से झूम रहा, महक रहा धरती का कण कण
रंग-बिरंगे फूलों की चुनरी ओढ़ धरती बनी दुल्हन
धरा के अप्रतिम सौन्दर्य को निरख रहा नील गगन।
आड़ू, पैंय्या, फ्यूंली सरसों से खिल उठा आँगन
चिड़ियों के कलरव से गूँज रहा अब वन- कानन।
पुष्प- पुष्प पर मंडराते भ्रमर कर रहे मधुर गुंजार
आमों के वृक्षो में मिश्री सा घुल रहा कोयल का सुर।
बह रही चहुँओर शीतल सुगन्धित मंद बयार
प्रफुल्लित हो मस्ती में नाच रहा मन-मयूर।
लाया बसंत सबके जीवन में प्रेम माधुर्य और उल्लास
सब ऋतुओं में ऋतुराज बसंत है सबसे ही खास।
पतझड़ को हरीतिमा में बदल दी जीवन को सौगात
'विमल' तभी तो कहलाता ऋतुओं का राजा बसन्त॥
रचयिता
विमला रावत,
सहायक अध्यापक,
राजकीय जूनियर हाईस्कूल नैल गुजराड़ा,
विकास क्षेत्र-यमकेश्वर,
जनपद-पौड़ी गढ़वाल,
उत्तराखण्ड।

Pranam di bahu hi sunder vyakha rituraj basant ki sunder bhavo se susajjit.👍👍👍
ReplyDeleteऋतु राज बसंत का सुंदर चित्रण आदरणिया।
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